Himachal NH-5 Dispute: शिमला-वांगटू राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-5) की खराब स्थिति और लंबे समय से लंबित मरम्मत कार्य को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने धली-नारकंडा और शिमला-वांगटू मार्ग की मरम्मत में करीब एक वर्ष की देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों में शामिल एनएच-5 की खराब स्थिति का सीधा असर आम लोगों, पर्यटकों, व्यापारिक गतिविधियों और आपदा प्रबंधन पर पड़ रहा है। ऐसे में लंबे समय तक मरम्मत कार्य अधूरा रहना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का संकेत देता है। Himachal NH-5 Dispute
यात्रियों और स्थानीय लोगों को हो रही भारी परेशानी
धली-नारकंडा और शिमला-वांगटू मार्ग प्रदेश के कई जिलों को जोड़ने वाला प्रमुख सड़क संपर्क है। इस सड़क से हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं, जिनमें स्थानीय लोग, पर्यटक, सेब उत्पादक और मालवाहक वाहन शामिल हैं। लेकिन जगह-जगह सड़क धंसने, गड्ढों और भूस्खलन प्रभावित हिस्सों के कारण लोगों को घंटों तक जाम का सामना करना पड़ता है।
बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। कई स्थानों पर सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। Himachal NH-5 Dispute
हाईकोर्ट ने मांगी देरी की पूरी जानकारी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों से पूछा कि जब सड़क की मरम्मत की आवश्यकता काफी पहले से थी, तो अब तक कार्य पूरा क्यों नहीं किया गया। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि परियोजना में देरी के पीछे क्या कारण रहे और जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे निर्धारित समय के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसमें मरम्मत कार्य की वर्तमान स्थिति, देरी के कारण और भविष्य की कार्ययोजना का स्पष्ट विवरण हो। Himachal NH-5 Dispute
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व्यापार और पर्यटन पर भी पड़ रहा असर
एनएच-5 हिमाचल प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इसी सड़क के माध्यम से ऊपरी क्षेत्रों से सेब सहित अन्य बागवानी उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाए जाते हैं। सड़क की खराब हालत के कारण परिवहन लागत बढ़ रही है और किसानों को समय पर अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, पर्यटन सीजन के दौरान भी इस मार्ग पर बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण यात्रियों को असुविधा होती है, जिससे प्रदेश के पर्यटन उद्योग पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। Himachal NH-5 Dispute
समयबद्ध कार्रवाई के संकेत
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित विभाग अब मरम्मत कार्य में तेजी लाएंगे और लंबे समय से लंबित परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती और नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम सड़क उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां संबंधित विभागों को अदालत के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी और यह बताना होगा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-5 की मरम्मत का कार्य कब तक पूरी तरह पूरा किया जाएगा। Himachal NH-5 Dispute
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Author- मानवी शर्मा


