नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच’ आंदोलन को अब किसानों का भी खुला और संगठित समर्थन मिल गया है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने घोषणा की है कि उसका एक प्रतिनिधिमंडल आज जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं से मुलाकात करेगा और उनकी मांगों के समर्थन में अपनी एकजुटता दर्ज कराएगा। Sonam Wangchuk
किसान संगठन का कहना है कि यह सिर्फ छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। ऐसे में किसानों का उनके साथ खड़ा होना जरूरी है।एसकेएम के इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि आंदोलन को नई ताकत मिल सकती है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है और सरकार को आंदोलनकारियों की आवाज को गंभीरता से सुनना चाहिए। Sonam Wangchuk
“युवा किसानों के ही बेटे-बेटियां हैं”
संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि छात्र और युवा किसानों के ही बेटे-बेटियां हैं। आज जो युवा अपने अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वही आने वाले समय में देश और समाज की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसलिए उनका संघर्ष किसानों से अलग नहीं है।संगठन ने कहा कि जब युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है तो उसका असर पूरे समाज और खेती-किसानी पर भी पड़ता है। इसी सोच के साथ एसकेएम ने इस आंदोलन का समर्थन करने का फैसला लिया है। संगठन ने कहा कि युवाओं की न्याय की लड़ाई में उनके साथ खड़ा होना सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। Sonam Wangchuk
आज जंतर-मंतर पहुंचेगा किसान प्रतिनिधिमंडल
एसकेएम के अनुसार, संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल आज जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल आंदोलन की स्थिति का जायजा लेने के साथ उनकी मांगों को समझेगा और सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन भी देगा।
किसान नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि कोई वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो रहा है, तो सरकार को उसकी बात सुननी चाहिए और बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। Sonam Wangchuk
Sonam Wangchuk के अनशन को भी मिला समर्थन
संयुक्त किसान मोर्चा ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के चल रहे अनशन का भी समर्थन किया है। संगठन का कहना है कि वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के पर्यावरण, स्थानीय लोगों के अधिकार, संवैधानिक सुरक्षा और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से उठा रहे हैं। एसकेएम ने कहा कि उनका अनशन लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना को मजबूत करता है। संगठन ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह वांगचुक की मांगों को गंभीरता से सुने और जल्द बातचीत शुरू करे, ताकि समाधान का रास्ता निकाला जा सके। Sonam Wangchuk
सरकार से संवाद की अपील
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत ही सबसे प्रभावी रास्ता होता है। संगठन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह छात्रों, युवाओं, किसान संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ सकारात्मक बातचीत करे और सभी मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकाले। एसकेएम का कहना है कि लंबे समय तक किसी भी आंदोलन या जनसरोकार से जुड़े मुद्दे को नजरअंदाज करने से लोगों में असंतोष बढ़ता है। इसलिए सरकार को समय रहते पहल करनी चाहिए। Sonam Wangchuk
आंदोलन को मिल रहा कई संगठनों का समर्थन
पिछले कुछ दिनों में जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को कई छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों का समर्थन मिल चुका है। अब संयुक्त किसान मोर्चा के खुलकर साथ आने से आंदोलन को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब अलग-अलग वर्ग किसी एक मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज उठाते हैं, तो उसका असर सरकार और प्रशासन पर भी पड़ता है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस आंदोलन का दायरा और बढ़ सकता है। Sonam Wangchuk
अब सभी की नजर आज जंतर-मंतर पर होने वाली गतिविधियों पर टिकी हुई है। किसान प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने के बाद आंदोलन की रणनीति और आगे की रूपरेखा पर भी चर्चा हो सकती है। वहीं, यह देखना भी अहम होगा कि सरकार आंदोलनकारियों और किसान नेताओं की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या बातचीत की दिशा में कोई नई पहल की जाती है। फिलहाल, संयुक्त किसान मोर्चा का यह समर्थन आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, जिसने इस पूरे मुद्दे को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दे दिया है। Sonam Wangchuk


