दिल्ली-एनसीआर समेत नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हुई झमाझम बारिश ने जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई, वहीं मानसून की पहली तेज बारिश ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के दावों की भी पोल खोल दी। करीब दो घंटे की बारिश के बाद शहर के कई सेक्टरों और प्रमुख सड़कों पर जलभराव हो गया। सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सवाल यह है कि अगर मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था पूरी कर ली गई होती, तो क्या शहर को इस हालात का सामना करना पड़ता? देखिए हमारी यह रिपोर्ट।

करीब दो घंटे की तेज बारिश ने ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों और मुख्य मार्गों को जलमग्न कर दिया। सड़कों पर पानी भरने से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगह वाहनों की रफ्तार थम गई और लंबा जाम लग गया। जलभराव के कारण पैदल चलने वाले लोगों की मुश्किलें भी बढ़ गईं। कई स्थानों पर लोग पानी में फिसलकर गिरते नजर आए, जबकि सड़क और गड्ढों का अंदाजा न लग पाने से हादसे का खतरा भी बना रहा। बारिश से मौसम जरूर सुहाना हो गया और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली, लेकिन पहली ही बारिश में जल निकासी व्यवस्था की पोल खुल गई। शहर के कई हिस्सों में जलभराव ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर मानसून से पहले प्राधिकरण की तैयारियां कितनी प्रभावी थीं।
फिलहाल यह तो मानसून की शुरुआत है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में होने वाली बारिश के दौरान ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण जलभराव की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है, ताकि लोगों को हर बारिश में ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
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