दो मासूम बहनों की दर्दभरी रात, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल.
किशोरावस्था की छोटी-छोटी नाराजगी कभी-कभी बड़े हादसों का रूप ले सकती है। दुद्धी क्षेत्र की दो नाबालिग सगी बहनों के साथ घटी घटना ने न केवल परिवारों को झकझोर दिया, बल्कि जिम्मेदार तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुद्धी क्षेत्र से मां की डांट से आहत होकर घर छोड़ने वाली दो नाबालिग सगी बहनों की कहानी ने हर किसी को भावुक कर दिया।
दुद्धी रेलवे स्टेशन के समीप सेक्टर नंबर-2 पावर हाउस स्थित काशीराम आवास निवासी महेंद्र की पुत्रियां सीता (17 वर्ष), जो कक्षा 10 की छात्रा है, और मीना (16 वर्ष), कक्षा 6 की छात्रा, मां की डांट से आहत होकर घर छोड़कर निकल गईं।

दोनों बहनें रात करीब नौ बजे म्योरपुर रेलवे स्टेशन पहुंचीं। वहां उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद जीआरपी कर्मी को साफ-साफ बताया कि वे घर से नाराज होकर आई हैं और अपने परिवार से अलग हैं। आरोप है कि इतनी संवेदनशील जानकारी मिलने के बावजूद न तो परिजनों को सूचना दी गई, न ही बाल कल्याण समिति या बाल संरक्षण इकाई से संपर्क किया गया।
दोनों बच्चियां पूरी रात रेलवे स्टेशन पर असुरक्षित अवस्था में रहीं। सुबह करीब पांच बजे उन्होंने यह सोचकर ट्रेन पकड़ ली कि वह दुद्धी जाएगी, लेकिन ट्रेन गलत दिशा में होने के कारण वे रॉबर्ट्सगंज रेलवे स्टेशन पहुंच गईं। रॉबर्ट्सगंज स्टेशन से दोनों बहनें पैदल बढ़ौली चौराहे तक पहुंचीं। वहां एक राहगीर के मोबाइल से उन्होंने अपने परिजनों को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी।

सूचना मिलते ही परिवार के साथ-साथ प्रशासन में भी हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलने पर बाल संरक्षण इकाई की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और दोनों बच्चियों को सुरक्षित संरक्षण में लिया। आवश्यक पूछताछ के बाद उन्हें परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई। बड़ी बहन सीता ने बताया कि पिता राजगीर मिस्त्री का काम करते हैं। मां की डांट से दुखी होकर उन्होने ने घर छोड़ने का निर्णय लिया और छोटी बहन भी उसके साथ निकल गई।
यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि यदि समय रहते जिम्मेदार एजेंसियां संवेदनशीलता से कार्रवाई करतीं, तो दो मासूम बच्चियों को पूरी रात असुरक्षित हालात में भटकना नहीं पड़ता। अब इस मामले में जीआरपी की भूमिका और कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं तथा जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की अपेक्षा की जा रही है।
साथ ही साथ सवाल ये भी उठता है की परिवार के सदस्य कहां थे उन्होने भी लापरवाही से काम किया अगर दोनों बच्चियों को कोई गलत व्यक्ति मिल जाता या फिर उसके साथ कोई दुष्कर्म करने की कोशिश करता तब क्या करता परिवार इस घटना से परिवार को ये सीख लेना चाहिए की यादि बच्चा 14 साल तक का हो गया है तो उसे डांटे पर अपनी निगरानी में भी रखे


