कानपुर देहात में एक मां अपने 9 साल के बेटे की जिंदगी बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर दर-दर भटक रही है। तीन महीने पहले मासूम ने पानी समझकर तेजाब पी लिया। इस हादसे ने उसकी जिंदगी ही बदल दी। पेट की आंत बुरी तरह जल गई, कई ऑपरेशन हुए और अब वह पिछले ढाई महीने से अपने मुंह से एक निवाला तक नहीं खा पाया है। डॉक्टरों ने इलाज जारी रखने के लिए सिर्फ 10 दिन का समय दिया है, लेकिन गरीब परिवार के पास पैसे नहीं हैं। ऐसे में मां की आखिरी उम्मीद अब जिला प्रशासन और सरकार से है।
कानपुर देहात के भीखनपुर गांव की रहने वाली वंदना कमल की आंखों में आंसू हैं और बेटे की आंखों में दर्द। दोनों जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे हैं, लेकिन किसी शिकायत के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी की भीख मांगने के लिए। करीब तीन महीने पहले घर में रखी एक बोतल में तेजाब रखा हुआ था जिसे पानी समझकर मासूम सत्य प्रकाश ने पी लिया था। जैसे ही तेजाब उसके शरीर के अंदर पहुंचा, उसकी चीखें पूरे घर में गूंज उठीं। आनन-फानन में परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक तेजाब उसकी खाने की नली और पेट की आंत झुलस चुकी थी।
परिवार के पास इलाज के लिए जमा-पूंजी खत्म हो चुकी है। इतना ही नहीं, बेटे की जान बचाने के लिए जमीन तक गिरवी रख दी। इसके बावजूद इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। इस समय सत्य प्रकाश का इलाज कानपुर नगर के कुलवंती अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों ने बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए कई जटिल ऑपरेशन किए हैं और उसके पेट में एक नली डाली गई है, जिसके जरिए उसे पानी, जूस और तरल आहार दिया जाता है। पिछले ढाई महीने से वह अपने मुंह से रोटी का एक टुकड़ा तक नहीं खा पाया है जिस बच्चे का वजन पहले 22 किलो था, वह अब घटकर महज 15 किलो रह गया है। लगातार कमजोर होता शरीर और मासूम की आंखों में खाना खाने की चाहत हर किसी को भावुक कर देती है।
डॉक्टरों ने परिवार को साफ शब्दों में कह दिया है कि इलाज के अगले चरण के लिए तत्काल ढाई लाख रुपये का इंतजाम कर जमा करने होंगे। परिवार का दावा है कि डॉक्टरों ने 10 दिन का समय दिया है। यदि तय समय में रकम जमा नहीं हुई तो इलाज प्रभावित हो सकता है। गरीबी से जूझ रहे दलित परिवार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने पैसे कहां से आएं। मजदूरी करने वाले पिता की आमदनी से घर चलाना मुश्किल है, ऐसे में लाखों रुपये का इलाज उनके लिए संभव नहीं है। मदद की उम्मीद लेकर पीड़ित मां अकबरपुर विधायक एवं राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला के पास भी पहुंची। मंत्री की ओर से आर्थिक सहायता के लिए संस्तुति पत्र जारी किया गया, लेकिन सरकारी प्रक्रिया पूरी होने में समय लग रहा है।
वंदना कमल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं। हालांकि उनकी जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन अधिकारियों ने उनके प्रार्थना पत्र और दस्तावेज लेकर जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया। मां की बस एक ही गुहार है कि सरकारी मदद जल्द मिल जाए, ताकि उसके बेटे का इलाज समय पर हो सके और वह फिर से सामान्य जिंदगी जी सके। वहीं 9 साल का सत्य प्रकाश आज भी बाकी बच्चों की तरह खाना खाना चाहता है। उसे चॉकलेट पसंद है, उसे रोटी खाने का मन करता है, लेकिन डॉक्टरों ने फिलहाल उसके मुंह से कुछ भी खाने पर रोक लगा रखी है।मासूम का कहना है कि उसके माता-पिता गरीब हैं और इलाज कराने में असमर्थ हैं। इसलिए उसने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की अपील की है। उसकी मासूम आवाज और आंखों का दर्द किसी का भी दिल पिघला सकता है।
फिलहाल प्रदेश में एक तरफ सरकारी योजनाएं गरीबों को बेहतर इलाज का भरोसा देती हैं, तो दूसरी तरफ यह परिवार समय के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। हर गुजरता दिन इस मासूम की जिंदगी के लिए बेहद अहम है। तो वही उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने अधिकारी और डॉक्टरों से बात कर जल्द से जल्द मासूम के उपचार की व्यवस्था को संपन्न कराने की बात कही है।
रिपोर्ट-गौरव शुक्ला/सोनू सिंह


