राजनीति में नेताओं को बड़ा साबित करने के लिए उनकी तुलना देश के महान महापुरुषों से करना आज एक आम बात बन गई है। कभी किसी को ‘नया सरदार पटेल’ बता दिया जाता है, तो कभी किसी को ‘नया चौधरी चरण सिंह’। लेकिन जब यह तुलना किसी ऐसे व्यक्ति से कर दी जाए, जिसका दामन विवादों और दंगों के दाग से घिरा रहा हो, तो देश का अन्नदाता और ग्रामीण भारत चुप नहीं बैठेगा। हाल ही में शामली में कुछ ऐसा ही हुआ, जिससे उत्तर प्रदेश के किसानों में भारी आक्रोश है।”
“बात हो रही है देश के पूर्व प्रधानमंत्री और ‘भारत रत्न’ से सम्मानित चौधरी चरण सिंह जी की। चौधरी चरण सिंह केवल एक नाम नहीं, बल्कि देश के करोड़ों किसानों के ‘किसान मसीहा’ और स्वाभिमान का दूसरा नाम हैं। उन्होंने जमींदारी व्यवस्था को समाप्त कर लाखों-करोड़ों देशवासियों को भू-स्वामी बनाया और उन्हें सम्मान से जीने का अधिकार दिया। महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को व्यावहारिक रूप देने वाले चौधरी चरण सिंह जी की तुलना जब एक ऐसे नेता से की जाए, जिनका अतीत विवादित रहा हो, तो यह देश के हर किसान का अपमान है।”शामली में किसानों ने चौधरी चरण सिंह की तुलना सुरेश राणा से करने को लेकर आज शामली कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया।
शामली में चौधरी चरण सिंह जी की तुलना पर आक्रोश, मुख्यमंत्री द्वारा सुरेश राणा की तुलना चौधरी चरण सिंह से किए जाने पर किसानों का विरोध। राजनीति में नेताओं को बड़ा साबित करने के लिए उनकी तुलना देश के महान महापुरुषों से करना आज एक आम बात बन गई है। कभी किसी को ‘नया सरदार पटेल’ बता दिया जाता है, तो कभी किसी को ‘नया चौधरी चरण सिंह’। लेकिन जब यह तुलना किसी ऐसे व्यक्ति से कर दी जाए, जिसका दामन विवादों और दंगों के दाग से घिरा रहा हो, तो देश का अन्नदाता और ग्रामीण भारत चुप नहीं बैठेगा। हाल ही में शामली में कुछ ऐसा ही हुआ, जिससे उत्तर प्रदेश के किसानों में भारी आक्रोश है।”
“बात हो रही है देश के पूर्व प्रधानमंत्री और ‘भारत रत्न’ से सम्मानित चौधरी चरण सिंह जी की। चौधरी चरण सिंह केवल एक नाम नहीं, बल्कि देश के करोड़ों किसानों के ‘किसान मसीहा’ और स्वाभिमान का दूसरा नाम हैं। उन्होंने जमींदारी व्यवस्था को समाप्त कर लाखों-करोड़ों देशवासियों को भू-स्वामी बनाया और उन्हें सम्मान से जीने का अधिकार दिया। महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को व्यावहारिक रूप देने वाले चौधरी चरण सिंह जी की तुलना जब एक ऐसे नेता से की जाए, जिनका अतीत विवादित रहा हो, तो यह देश के हर किसान का अपमान है।”शामली में किसानों ने चौधरी चरण सिंह की तुलना सुरेश राणा से करने को लेकर आज शामली कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया।
“शामली की एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा की तुलना सीधे चौधरी चरण सिंह जी से कर दी। इस बयान के बाद से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों में नाराजगी की लहर दौड़ गई है। किसानों और विश्लेषकों का साफ कहना है कि राजनीति में आने से पहले सुरेश राणा पर आपराधिक मामलों के आरोप रहे हैं। वर्ष 2013 की सांप्रदायिक हिंसा में उनकी भूमिका और आचार संहिता उल्लंघन के आरोप किसी से छिपे नहीं हैं। और तो और जब वे खुद उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री थे, तब वे शामली जिले की चीनी मिलों का किसानों को समय पर गन्ना भुगतान तक नहीं करा पाए थे।”
“किसानों का मानना है कि विवादित पृष्ठभूमि से आने वाले नेता की छवि चमकाने के लिए भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जैसे महान व्यक्तित्व का वैचारिक अवमूल्यन किया जा रहा है। ग्रामीण भारत और किसानों की मांग बिल्कुल स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी शामली में की गई इस तुलना पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करें और भविष्य में राजनीतिक लाभ के लिए देश के महान सपूतों और भारत रत्नों को संकीर्ण राजनीतिक बहसों में न घसीटा जाए।
“शामली की एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा की तुलना सीधे चौधरी चरण सिंह जी से कर दी। इस बयान के बाद से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों में नाराजगी की लहर दौड़ गई है। किसानों और विश्लेषकों का साफ कहना है कि राजनीति में आने से पहले सुरेश राणा पर आपराधिक मामलों के आरोप रहे हैं। वर्ष 2013 की सांप्रदायिक हिंसा में उनकी भूमिका और आचार संहिता उल्लंघन के आरोप किसी से छिपे नहीं हैं। और तो और जब वे खुद उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री थे, तब वे शामली जिले की चीनी मिलों का किसानों को समय पर गन्ना भुगतान तक नहीं करा पाए थे।”
“किसानों का मानना है कि विवादित पृष्ठभूमि से आने वाले नेता की छवि चमकाने के लिए भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जैसे महान व्यक्तित्व का वैचारिक अवमूल्यन किया जा रहा है। ग्रामीण भारत और किसानों की मांग बिल्कुल स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी शामली में की गई इस तुलना पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करें और भविष्य में राजनीतिक लाभ के लिए देश के महान सपूतों और भारत रत्नों को संकीर्ण राजनीतिक बहसों में न घसीटा जाए।
रिपोर्ट- पंकज मलिक/सोनू सिंह


