कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (CWG) में जेवलिन थ्रो के फाइनल से पहले ज्यादातर दर्शकों की निगाहें नीरज चोपड़ा पर टिकी थी। नीरज ने पिछले वर्षों में अपनी निरंतरता और बड़े आयोजन में प्रदर्शन से खुद को विश्व स्तरीय थ्रोअर के रूप में स्थापित किया है, इसलिए गोल्ड की उम्मीद स्वाभाविक थी।
CWG प्रतियोगिता में प्रमुख प्रतियोगी अनुपस्थित थे। जिस कारण नीरज का पदक पक्का माना जा रहा था। मगर खेल में आश्चर्यजनक मोड़ वही लाते हैं जो सोच से परे हों इस बार ऐसा मोड़ श्रीलंका के तेज-तर्रार एथलीट रुमेश पाथिरागे के रूप में आया।
CWG मुकाबले के प्रारंभ में रुमेश का नाम कम लोग जानते थे। नीरज स्वर्ण पदक के लिए सबसे बड़े दावेदारों में से एक थे उनके सामने पाकिस्तान के अरशद नदीम और कुछ अन्य खतरा बने हुए थे। फाइनल में रुमेश ने तगड़ा थ्रो दिखाया और 89.75 मीटर का थ्रो कर नीरज को पहले स्थान से खिसका दिया।
नीरज आगे यह दूरी पार नहीं कर पाए और स्वर्ण पदक रुमेश के नाम रहा। इस जीत में दिलचस्प बात यह थी कि रुमेश ने सिर्फ नीरज ही नहीं, बल्कि मौजूदा विश्व चैंपियन केशॉर्न वालकोट और ओलंपिक पदकधारी अरशद नदीम जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया। अरशद तो आखिरी आठ में भी जगह नहीं बना पाए। CWG
रुमेश शुरुआत में क्रिकेटर थे और तेज गेंदबाजी करते थे। किशोरावस्था में वे 134 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे। इसलिए श्रीलंका में ईशान मलिंगा के बाद वे दूसरे सबसे तेज गेंदबाजों में गिने जाते थे। तेज गेंदबाजी की तकनीक, शारीरिक कठोरता और लाइन-लेंथ का ज्ञान बाद में जेवलिन थ्रो की तकनीक में बदलकर उनके काम आया। CWG
यह बदलाव कोच टोनी प्रसन्ना की सलाह और मार्गदर्शन का परिणाम था। टोनी ने रुमेश को जेवलिन की बुनियादी तकनीक सही करने और शारीरिक तवज्जो देने की प्रेरणा दी। रुमेश खुद कहते हैं कि टोनी सिर्फ कोच नहीं, जीवन के मार्गदर्शक भी हैं; उन्होंने खेल से बाहर भी उन्हें समझाया और संभाला। CWG
टोनी प्रसन्ना की कोचिंग में रुमेश ने अपने बेसिक्स पर जोर दिया तेज गेंदबाजी से आने वाली क्विक-हेड और शक्ति का लाभ उन्हें मिला। तेज रन-अप और बूमिंग थ्रो की आदतें जेवलिन थ्रो में सहायक रहीं। शारीरिक मजबूती के साथ-साथ तकनीक पर लगातार मेहनत ने उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ को उभारा। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 92.62 मीटर का भी रिकॉर्ड है, जो दर्शाता है कि 89.75 मीटर फाइनल में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं था, फिर भी उतना पर्याप्त रहा कि बड़े प्रतिद्वंद्वियों को परास्त कर सके। CWG
बड़े मुकाबले का दबाव अक्सर प्रतिभा से अधिक मानसिक संतुलन को बिगाड़ता है। रुमेश ने फाइनल के मौके पर संयम और एकाग्रता दिखाई। छोटे-छोटे तकनीकी सुधारों और हर थ्रो के बाद खुद को री-सेट करने की क्षमता ने उन्हें सफल बनाया। वहीं नीरज जैसे अनुभवी खिलाड़ी पर भी लोगों की उम्मीदों का दबाव था। ऐसी परिस्थितियों में रुमेश ने शांतिपूर्ण, रणनीतिक और सटीक प्रदर्शन कर चमत्कार कर दिखाया। CWG
रुमेश के पास जेवलिन की दुनिया में बड़ा नाम बनने की क्षमता है। उनका 92.62 मीटर का सर्वश्रेष्ठ संकेत करता है कि यदि वे फॉर्म और निरंतरता बनाए रखें तो ओलंपिक और विश्व चैम्पियनशिप जैसी प्रतियोगिताओं में भी पदकों की दावेदारी कर सकते हैं। कोच टोनी का मार्गदर्शन और लगातार तकनीकी परिश्रम उनके अगले लक्ष्यों को संभव बना सकता है।
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कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 CWG का यह परिणाम याद दिलाता है कि खेल में कभी भी किसी को कम नहीं आंकना चाहिए। रुमेश पाथिरागे की कहानी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो बहुरंगी पृष्ठभूमि से आते हुए भी सही कोचिंग, प्रतिबद्धता और मेहनत से वैश्विक मंच पर चमक सकते हैं।
रिपोर्ट- सोनू सिंह @NATION27


