Duleep Trophy Selection Controversy: भारतीय घरेलू क्रिकेट में हर साल रणजी ट्रॉफी के बाद Duleep Trophy का आयोजन किया जाता है, जिसे राष्ट्रीय टीम में चयन का सबसे बड़ा द्वार माना जाता है। लेकिन, 2026 के दलीप ट्रॉफी के लिए सेंट्रल ज़ोन की टीम की घोषणा ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस विवाद के केंद्र में हैं उत्तराखंड के स्टार स्पिनर मयंक मिश्रा, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन के बावजूद खुद को टीम से बाहर पाया है।
मयंक मिश्रा के चयन पर विवाद की वजह
मयंक मिश्रा ने पिछले रणजी सत्र में अपनी फिरकी का जादू बिखेरते हुए मात्र 8 मैचों में 59 विकेट लिए थे। किसी भी गेंदबाज के लिए एक सत्र में इतने विकेट लेना उसकी असाधारण क्षमता को दर्शाता है। मयंक के आंकड़ों की तुलना यदि अन्य स्पिनरों से की जाए, तो वे कहीं अधिक प्रभावशाली नजर आते हैं। Duleep Trophy Selection

उनकी इस अनदेखी के बाद मयंक ने सोशल मीडिया पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए एक पोस्ट लिखा, (If 59 wickets are not enough then what else a bowler can do in a season… this is very disappointing but You can’t dwell on disappointment… You’ve got to take the positives and keep looking ahead. Will not stop here 🙏) पोस्ट में उनका दर्द साफ झलकता है, जिसमें वे कह रहे है कि “अगर 59 विकेट भी काफी नहीं हैं, तो एक गेंदबाज और क्या कर सकता है?” उनका यह दर्द उन हजारों युवा खिलाड़ियों की आवाज है जो कड़ी मेहनत के बावजूद चयन प्रक्रिया की भेंट चढ़ जाते हैं।
मयंक मिश्रा: करियर के शानदार आंकड़े
मयंक का अब तक का फर्स्ट-क्लास करियर इस बात का प्रमाण है कि वे निरंतरता के प्रतीक हैं। उनके करियर के प्रमुख आंकड़े निम्नलिखित हैं:
| प्रारूप | मैच | विकेट | सर्वश्रेष्ठ | इकोनॉमी |
|---|---|---|---|---|
| फर्स्ट-क्लास | 41 | 175 | 7/44 | 2.93 |
| लिस्ट-ए | 32 | 38 | 4/15 | 4.12 |
| T20 | 19 | 20 | 4/6 | 7.09 |
उनके ये आंकड़े बताते हैं कि वह केवल एक सत्र के खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में अपनी उपयोगिता सिद्ध कर रहे हैं। 23.25 का गेंदबाजी औसत किसी भी स्पिनर के लिए बेहतरीन माना जाता है।
चयन में ‘ज़ीशान अंसारी’ फैक्टर
विवाद की आंच तब और तेज हो गई जब चयनकर्ताओं ने टीम में ज़ीशान अंसारी को शामिल किया। ज़ीशान के चयन पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि उन्होंने पिछले 6 वर्षों से कोई भी फर्स्ट-क्लास मैच नहीं खेला है। इसके अलावा, आईपीएल 2026 में भी उन्हें सनराइजर्स हैदराबाद की ओर से एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला था। ऐसे में, एक खिलाड़ी जिसने लगातार क्रिकेट खेलकर विकेटों का अंबार लगाया, उसे दरकिनार कर लंबे समय से बाहर चल रहे खिलाड़ी को प्राथमिकता देना चयन समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है!
दलीप ट्रॉफी 2026 के लिए घोषित ‘सेंट्रल ज़ोन स्क्वॉड’
रजत पाटीदार (कप्तान), आर्यन जुयाल (विकेटकीपर), सरांश जैन, अमन मोखाड़े, कुणाल चंदेला, ज़ीशान अंसारी, आर्यन पांडे, अरशद खान, रिंकू सिंह (उप-कप्तान), आयुष पांडे, यश राठौड़, हर्ष दुबे, कुणाल सिंह राठौर, यश ठाकुर, नचिकेत भूते

क्या दलीप ट्रॉफी अब सिर्फ ‘नाम’ की प्रतियोगिता है?
दलीप ट्रॉफी का मुख्य उद्देश्य उभरती प्रतिभाओं को निखारना और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को परखना होता है। यदि चयन का आधार प्रदर्शन नहीं है, तो घरेलू क्रिकेट की नींव हिलनी तय है। क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से न केवल खिलाड़ियों का मनोबल गिरता है, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए भी यह खतरनाक संकेत हैं।
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पारदर्शिता की आवश्यकता
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) हमेशा से पारदर्शिता की वकालत करता रहा है, लेकिन सेंट्रल ज़ोन चयन समिति के इस फैसले ने प्रशंसकों के मन में कई शंकाएं पैदा कर दी हैं। क्या चयन में क्षेत्रीय प्रभाव काम कर रहा है? क्या आंकड़ों से ज्यादा किसी अन्य गुप्त मानदंड को महत्व दिया जा रहा है? इन सवालों का जवाब मिलना आवश्यक है ताकि खिलाड़ियों का भरोसा इस प्रणाली पर बना रहे।
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मयंक मिश्रा का मामला कोई पहला नहीं है, लेकिन यह एक चेतावनी है। यदि प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया जाएगा, तो देश को प्रतिभावान खिलाड़ी मिलने में कठिनाई होगी। समय आ गया है कि चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और केवल मेरिट (योग्यता) को ही चयन का एकमात्र आधार माना जाए। मयंक का करियर अभी लंबा है और वे जिस दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं, वह उनके खेल के प्रति जुनून को दर्शाता है। उम्मीद है कि भविष्य में चयनकर्ता अपने निर्णयों में निष्पक्षता और तार्किकता को प्राथमिकता देंगे। Duleep Trophy Selection
रिपोर्ट- सोनू सिंह @Nation27

