हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और ज्यादा सख्त करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाएगा। अब अगर कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत लेते हुए या भ्रष्टाचार के किसी मामले में दोषी पाया जाता है, तो उसे भविष्य में उसी जिले और उसी पद पर दोबारा तैनाती नहीं मिलेगी।
सरकार का मानना है कि कई मामलों में कार्रवाई के बाद कुछ अधिकारी या कर्मचारी समय बीतने पर फिर उसी जिले या उसी जिम्मेदारी वाले पद पर लौट आते थे, जिससे व्यवस्था पर सवाल उठते थे। अब इस पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी कर ली गई है।
मुख्यमंत्री ने दिया साफ संदेश
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे अधिकारी बड़ा हो या छोटा, अगर वह जनता से रिश्वत मांगता है या अपने पद का गलत इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। उन्होंने कहा कि सरकार ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहती है और सरकारी दफ्तरों में लोगों को बिना रिश्वत दिए उनका काम हो, यही सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी तरह की सिफारिश, दबाव या पक्षपात नहीं चलेगा। सभी मामलों में कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी और दोषियों को किसी भी तरह की राहत नहीं मिलेगी।
जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बाद तेज हुई कार्रवाई
सरकारी सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय से हरियाणा के कई सांसदों और विधायकों ने मुख्यमंत्री के सामने अलग-अलग सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतें रखी थीं। लोगों की तरफ से भी लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई दफ्तरों में छोटे-छोटे काम करवाने के लिए भी रिश्वत मांगी जाती है। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाए और किसी भी दोषी को बख्शा न जाए।
एसीबी चला रही अब तक का सबसे बड़ा अभियान
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया है। अलग-अलग जिलों में लगातार छापेमारी की जा रही है और रिश्वत लेते हुए अधिकारियों व कर्मचारियों को रंगे हाथों पकड़ने की कार्रवाई भी तेज कर दी गई है। एसीबी की टीमें शिकायत मिलने के बाद तुरंत कार्रवाई कर रही हैं। कई मामलों में सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है, जिससे सरकारी महकमों में भी सतर्कता बढ़ी है।
दोबारा उसी जगह नहीं मिलेगी पोस्टिंग
हरियाणा सरकार के इस फैसले का सबसे अहम हिस्सा यह है कि भ्रष्टाचार में पकड़े गए अधिकारी या कर्मचारी को भविष्य में उसी जिले और उसी पद पर दोबारा नियुक्त नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे गलत काम करने वालों को साफ संदेश जाएगा कि कार्रवाई सिर्फ निलंबन या गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके पूरे करियर पर इसका असर पड़ेगा।
जनता का भरोसा बढ़ाने की कोशिश
सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद सिर्फ दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करना भी है। अगर सरकारी दफ्तरों में बिना रिश्वत के काम होगा तो लोगों का विश्वास बढ़ेगा और प्रशासन पहले से ज्यादा पारदर्शी बनेगा।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
हरियाणा सरकार ने संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। जिन विभागों से सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही हैं, वहां निगरानी और सख्त की जाएगी। सरकार का दावा है कि ईमानदार अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरा संरक्षण मिलेगा, जबकि भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस नीति का सरकारी कामकाज और जनता को मिलने वाली सेवाओं पर कितना असर पड़ता है।


