झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। लगातार कई दिनों से सड़कों पर डटे युवाओं के बढ़ते दबाव के बाद आखिरकार हेमंत सोरेन सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की पहल की है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलावा भेजा गया है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि केवल बातचीत नहीं, बल्कि उनकी मांगों पर ठोस फैसला ही आंदोलन खत्म करने की वजह बनेगा।
कई दिनों से राजधानी रांची में हजारों अभ्यर्थी धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरती गई और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। प्रदर्शनकारी निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं।
सरकार पर बढ़ा दबाव, विपक्ष भी आया समर्थन में
छात्र आंदोलन लगातार मजबूत होता गया तो इसका असर राजनीतिक गलियारों में भी दिखाई देने लगा। विपक्षी दलों ने सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। विपक्ष का कहना है कि सरकार को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और जल्द समाधान निकालना चाहिए। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह छात्रों की चिंताओं को समझती है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करेगी। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री की ओर से वार्ता का निमंत्रण भेजा गया है।
आंदोलन के भीतर भी दिखे मतभेद
सरकार से बातचीत के प्रस्ताव के बाद आंदोलन के भीतर अलग-अलग राय सामने आने लगी हैं। कुछ छात्र प्रतिनिधियों का मानना है कि सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की जानी चाहिए, जबकि कुछ का कहना है कि जब तक सभी प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक धरना जारी रहना चाहिए। छात्र नेताओं ने साफ किया कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और किसी भी फैसले से पहले सभी प्रदर्शनकारियों की राय ली जाएगी।
पंजाब में पेपर लीक के विरोध में छात्रों पर पानी की बौछारें
झारखंड के साथ-साथ पंजाब में भी छात्रों का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला। कथित पेपर लीक मामले को लेकर बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन करने पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस कार्रवाई को लेकर छात्र संगठनों ने नाराजगी जताई और सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की।
राजस्थान में मूक-बधिर छात्रों के प्रदर्शन का असर
राजस्थान में भी छात्रों के आंदोलन का असर देखने को मिला। एक सरकारी संस्थान में अपनी मांगों को लेकर मूक-बधिर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। मामला तूल पकड़ने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल को उनके पद से हटा दिया। छात्रों ने इसे अपनी पहली जीत बताया, हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी अन्य मांगों पर भी जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।
देशभर में युवाओं के मुद्दे बने चर्चा का केंद्र
झारखंड, पंजाब और राजस्थान की घटनाओं ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि रोजगार, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। अलग-अलग राज्यों में छात्र अपने-अपने मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं और सरकारों से जवाब मांग रहे हैं। अब सभी की नजर झारखंड सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस बैठक का नतीजा न केवल झारखंड के आंदोलन की दिशा तय करेगा, बल्कि दूसरे राज्यों में चल रहे छात्र आंदोलनों पर भी इसका असर पड़ सकता है।


