राघव चड्ढा: देश में इलाज के बढ़ते खर्च और मेडिकल सिस्टम में पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित ‘कट मनी’ (कमीशन) के खेल का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में मरीजों को जरूरत से ज्यादा मेडिकल टेस्ट सिर्फ इसलिए लिखे जाते हैं ताकि डॉक्टरों को डायग्नोस्टिक सेंटरों से कमीशन मिल सके।
राघव चड्ढा ने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक शोषण का मामला नहीं है, बल्कि मरीजों के भरोसे और स्वास्थ्य से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने सरकार से इस पर सख्त कार्रवाई करने और पूरे सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग की।
“जरूरत नहीं, फिर भी लिखे जाते हैं कई टेस्ट”
संसद में अपनी बात रखते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि देश के लाखों मरीज डॉक्टरों की सलाह पर भरोसा करते हैं, लेकिन अगर किसी मरीज को बिना जरूरत कई तरह के टेस्ट कराने पड़ें, तो इसका सीधा असर उसकी जेब पर पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि कुछ निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में डॉक्टरों को हर रेफरल के बदले कमीशन दिया जाता है। इसी वजह से कई बार मरीजों को ऐसे टेस्ट भी लिख दिए जाते हैं, जिनकी वास्तव में जरूरत नहीं होती।
इलाज महंगा, मरीजों पर बढ़ रहा बोझ
राघव चड्ढा ने कहा कि पहले ही दवाइयों, अस्पतालों और इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगर मरीजों को गैर-जरूरी जांच भी करानी पड़े, तो यह उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। खासकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति और मुश्किल हो जाती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य मरीज का सही इलाज होना चाहिए, न कि किसी तरह का आर्थिक फायदा कमाना।
सरकार से क्या मांग की?
राघव चड्ढा ने सरकार से मांग की कि डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच होने वाले किसी भी तरह के कमीशन या ‘कट मनी’ सिस्टम की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही ऐसे मामलों पर सख्त नियम बनाए जाएं ताकि मरीजों को सिर्फ वही जांच करानी पड़े जो वास्तव में जरूरी हो। उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है, जिससे मरीजों का भरोसा मजबूत हो और उन्हें बेवजह आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
पहले भी उठते रहे हैं ऐसे सवाल
डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित कमीशन का मुद्दा नया नहीं है। समय-समय पर इस तरह के आरोप सामने आते रहे हैं। हालांकि मेडिकल संगठनों का कहना रहा है कि सभी डॉक्टरों को एक नजर से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में डॉक्टर पूरी ईमानदारी और प्रोफेशनल तरीके से अपनी सेवाएं देते हैं। संसद में राघव चड्ढा द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के बाद एक बार फिर देश में मेडिकल सिस्टम की पारदर्शिता, मरीजों के अधिकार और इलाज की बढ़ती लागत को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।


