बिहार के मुजफ्फरपुर में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा को नौकरी का झांसा देकर मानव तस्करी के जाल में फंसाने का मामला सामने आया है। भाई की डांट से नाराज होकर घर से निकली छात्रा रेलवे स्टेशन पहुंची थी, जहां उसकी मुलाकात एक युवक से हुई।
युवक ने उसे कोलकाता में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और अपने साथ ले गया। आरोप है कि इसके बाद छात्रा को कोलकाता के रेड लाइट एरिया में बेच दिया गया। करीब एक महीने बाद उसे भागलपुर के एक रेड लाइट एरिया में ले जाया गया।
करीब 85 दिनों तक तस्करों के चंगुल में रहने के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस की विशेष टीम ने भागलपुर में छापेमारी कर छात्रा को सुरक्षित बरामद कर लिया। इसी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नालंदा की एक अन्य किशोरी को भी मुक्त कराया है।
भाई की डांट से नाराज होकर 10 मई को निकली थी घर से
मामला मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा 10 मई को भाई की डांट से नाराज होकर घर से निकल गई थी। काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला तो 12 मई को उसके भाई ने गायघाट थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामला दर्ज कर छात्रा की तलाश शुरू की। शुरुआती जांच में एक युवक पर संदेह हुआ, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर उसकी भूमिका सामने नहीं आई। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर छात्रा की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई।
स्टेशन पर रो रही थी छात्रा, तभी मिला तस्करी का आरोपी
रेस्क्यू के बाद छात्रा ने पुलिस को बताया कि घर से निकलने के बाद वह मुजफ्फरपुर जंक्शन पर अकेली बैठी थी। वह परेशान थी और रो रही थी। इसी दौरान एक युवक उसके पास आया। युवक ने उससे बातचीत की और कोलकाता में अच्छी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। नौकरी की उम्मीद में छात्रा उसके साथ कोलकाता चली गई। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसकी मुश्किलें शुरू हो गईं।
पुलिस के मुताबिक, छात्रा को कथित तौर पर कोलकाता के रेड लाइट एरिया में बेच दिया गया। छात्रा ने वहां जाने और जबरन रखे जाने का विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई। पुलिस को दिए बयान में उसने अपने साथ हुई हिंसा के बारे में भी जानकारी दी है।
एक महीने बाद भागलपुर के रेड लाइट एरिया में पहुंचाया
पुलिस के अनुसार, करीब एक महीने बाद छात्रा को कोलकाता से भागलपुर के इशीपुर बरहट थाना क्षेत्र के सिवानपुर स्थित रेड लाइट एरिया में ले जाया गया। यानी उसे लगातार एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता रहा।
इधर, मुजफ्फरपुर में परिवार अपनी बेटी की तलाश में जुटा था। पुलिस टीम भी लगातार उसके बारे में सुराग जुटा रही थी। छात्रा की तस्वीर मानव तस्करी से जुड़े संभावित ठिकानों तक भेजी गई और अलग-अलग इलाकों में मुखबिरों को सक्रिय किया गया।
सूचना मिलते ही भागलपुर पहुंची पुलिस टीम
पुलिस को दो दिन पहले सूचना मिली कि जिस किशोरी की तलाश की जा रही है, वह भागलपुर के सिवानपुर इलाके में एक मकान के अंदर है। सूचना मिलते ही मुजफ्फरपुर पुलिस की विशेष टीम भागलपुर पहुंची। टीम ने पहले इलाके की रेकी की और संदिग्ध मकान की पहचान की। इसके बाद पुलिस ने वहां छापेमारी की।
पुलिस के मुताबिक, छापेमारी के दौरान वहां मौजूद लोगों ने टीम का विरोध किया। धक्का-मुक्की और हाथापाई की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ने पर महिला जांच अधिकारी पूजा कुमारी को अपनी सर्विस पिस्टल निकालनी पड़ी। करीब 52 मिनट तक चले संघर्ष के बाद पुलिस टीम छात्रा को सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रही।
उसी मकान से नालंदा की किशोरी भी मिली
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस को उसी मकान से नालंदा जिले की एक अन्य किशोरी भी मिली। उसने भी पुलिस से मदद की गुहार लगाई। पुलिस ने उसे भी सुरक्षित मुक्त कराया और मामले की जानकारी नालंदा पुलिस को दी गई है।
मुजफ्फरपुर पुलिस के मुताबिक, छात्रा का कोर्ट में बयान दर्ज कराया गया है। छात्रा ने अपनी बड़ी बहन के साथ रहने की इच्छा जताई है। इसके बाद पुलिस ने उसे परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
डीएसपी पूर्वी-1 अलय वत्स के अनुसार, छात्रा के लापता होने के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। मिले इनपुट के आधार पर भागलपुर के सिवानपुर से उसे सुरक्षित बरामद किया गया। इसी कार्रवाई में नालंदा की एक अन्य किशोरी को भी मुक्त कराया गया।
अब तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच
पुलिस की जांच अब छात्रा की बरामदगी से आगे बढ़ गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। छात्रा को मुजफ्फरपुर से कोलकाता कौन लेकर गया, उसे वहां किसके हवाले किया गया और फिर कोलकाता से भागलपुर पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही—इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।


