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Lucknow में शत्रु संपत्तियों पर शिकंजा, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

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Lucknow में शत्रु संपत्तियों पर शिकंजा
Lucknow में शत्रु संपत्तियों पर शिकंजा
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मौजूद हजारों शत्रु संपत्तियों को लेकर केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन संपत्तियों को आगे न तो किराये पर दिया जाएगा और न ही नई लीज की जाएगी। जिन संपत्तियों की लीज या किरायेदारी पहले से चल रही है, उनकी अवधि पूरी होने के बाद उसका नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा। अनुबंध खत्म होने के बाद संबंधित संपत्ति को सरकार अपने कब्जे में लेकर उसकी नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।

गृह मंत्रालय के इन निर्देशों के बाद लखनऊ स्थित अभिरक्षा कार्यालय ने उत्तर प्रदेश के संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर उन शत्रु संपत्तियों की पहचान करने को कहा गया है, जिन पर लंबे समय से अवैध कब्जा है या जिनका इस्तेमाल बिना वैध अनुबंध के किया जा रहा है।

निर्देशों के मुताबिक, जिन लोगों के पास शत्रु संपत्ति पर कब्जे का कोई वैध किरायेदारी, लीज या लाइसेंस अनुबंध नहीं है, उन्हें परिसर खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। अगर तय समय में कब्जा नहीं हटाया गया तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई की जाएगी और संपत्ति को सरकारी कब्जे में लिया जाएगा।

क्या होती है शत्रु संपत्ति?

भारत-पाकिस्तान विभाजन और उसके बाद हुए युद्धों के दौरान कई ऐसे लोग भारत छोड़कर पाकिस्तान या अन्य देशों में चले गए, जिनकी जमीन, मकान, दुकान और दूसरी अचल संपत्तियां भारत में रह गईं। ऐसी संपत्तियों को कानून के तहत सरकार ने अपने नियंत्रण में लिया। इन्हें सामान्य तौर पर ‘शत्रु संपत्ति’ कहा जाता है। इन संपत्तियों की देखरेख के लिए केंद्र सरकार के अधीन कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया यानी अभिरक्षा व्यवस्था बनाई गई है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद इन संपत्तियों का प्रबंधन इसी व्यवस्था के जरिए किया जाता है। समय के साथ कई शत्रु संपत्तियां बाजारों, दुकानों, व्यावसायिक परिसरों और अन्य उपयोग में आ गईं। कई जगह इन पर किरायेदार या लीजधारी वर्षों से बने हुए हैं। समस्या यह है कि कई मामलों में किराया बेहद कम है, जबकि इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत और व्यावसायिक महत्व काफी ज्यादा है।

यूपी और उत्तराखंड में करीब 5600 शत्रु संपत्तियां

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में करीब 5600 शत्रु संपत्तियां मौजूद बताई जा रही हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां भी हैं, जिनका इस्तेमाल लंबे समय से किराये या लीज के आधार पर हो रहा है। कुछ संपत्तियों पर अवैध कब्जे की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। गृह मंत्रालय का मानना है कि दशकों पुराने अनुबंधों और बेहद कम किराये के कारण इन संपत्तियों से सरकार को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।

इसी वजह से अब पुराने इंतजाम को बदलने की दिशा में कदम उठाया गया है। नए निर्देशों के तहत सबसे पहले संपत्तियों पर कब्जे और अनुबंध की स्थिति की जांच की जाएगी। इसके बाद वैध और अवैध कब्जेदारों को अलग-अलग श्रेणी में रखा जाएगा। जिनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं होगा, उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी, जबकि वैध किरायेदारों और लीजधारकों को अनुबंध की अवधि पूरी होने तक संपत्ति में रहने की अनुमति होगी।

लीज खत्म होने के बाद नहीं होगा नवीनीकरण

गृह मंत्रालय ने सबसे अहम निर्देश यह दिया है कि मौजूदा लीज या किरायेदारी की अवधि खत्म होने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। यानी जिन लोगों के साथ सरकार का मौजूदा अनुबंध चल रहा है, उन्हें फिलहाल अनुबंध की शर्तों के मुताबिक संपत्ति इस्तेमाल करने का अधिकार रहेगा, लेकिन अवधि खत्म होने के बाद उन्हें परिसर खाली करना होगा। इसके बाद संपत्ति को अभिरक्षा कार्यालय अपने कब्जे में लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू करेगा। सरकार ऐसी संपत्तियों की नीलामी कर सकती है, जिससे लंबे समय से कम आय देने वाली संपत्तियों का बेहतर आर्थिक उपयोग संभव हो सके।

हजरतगंज का हलवासिया मार्केट बना बड़ा उदाहरण

राजधानी लखनऊ में स्थित हलवासिया मार्केट इस पूरे मामले का सबसे चर्चित उदाहरण है। हजरतगंज जैसे शहर के सबसे पॉश और व्यस्त इलाकों में मौजूद यह संपत्ति करीब 10 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैली हुई बताई जा रही है। इतनी महत्वपूर्ण व्यावसायिक जगह होने के बावजूद इस संपत्ति से मिलने वाला किराया बेहद कम है। बताया गया है कि इसका मासिक किराया करीब 700 रुपये है।

आज के दौर में हजरतगंज जैसे प्रमुख बाजार में इतनी बड़ी जमीन के लिए यह रकम बेहद मामूली मानी जाएगी। दशकों से चली आ रही लीज के कारण किराया उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया, जिस स्तर की आय ऐसी बेशकीमती संपत्ति से होने की उम्मीद की जा सकती है। यही वजह है कि हलवासिया मार्केट को लेकर सरकार के नए फैसले को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अगले साल खत्म हो रही है हलवासिया मार्केट की लीज

हलवासिया मार्केट की मौजूदा लीज अगले साल खत्म होने की बात सामने आई है। ऐसे में अब इस संपत्ति को लेकर आगे की प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी। लीज खत्म होने के बाद पुराने अनुबंध को आगे बढ़ाने के बजाय सरकार इसे अपने कब्जे में लेकर नीलामी की दिशा में कदम उठा सकती है। अगर ऐसा होता है तो लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। वहीं, इससे जुड़े कारोबारियों और किरायेदारों के लिए भी यह फैसला काफी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि उन्हें मौजूदा अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद संपत्ति खाली करनी पड़ सकती है।

अवैध कब्जेदारों को सिर्फ 15 दिन का समय

गृह मंत्रालय ने अवैध कब्जों को लेकर भी स्पष्ट समयसीमा तय की है। जिन लोगों के पास शत्रु संपत्ति पर कब्जे का कोई वैध आधार नहीं है, उन्हें 15 दिन के भीतर परिसर खाली करना होगा। अगर नोटिस मिलने के बाद भी कब्जा बरकरार रहता है तो प्रशासन बेदखली की कार्रवाई कर सकता है। इसके बाद संपत्ति को सरकार के नियंत्रण में लिया जाएगा। जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि संपत्तियों की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि कौन व्यक्ति किस आधार पर संपत्ति का इस्तेमाल कर रहा है। इस प्रक्रिया में पुराने दस्तावेज, लीज डीड, किरायेदारी समझौते और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।

दशकों पुराने किराये पर अब सरकार की नजर

दरअसल, शत्रु संपत्तियों को लेकर सबसे बड़ी समस्या सिर्फ अवैध कब्जे की नहीं है। कई संपत्तियां दशकों पुराने किराये और लीज पर चल रही हैं। उस समय तय की गई रकम आज के बाजार मूल्य के मुकाबले बेहद कम हो चुकी है। समय के साथ शहरों का विस्तार हुआ, जमीनों की कीमत बढ़ी और कई इलाके प्रमुख व्यावसायिक केंद्र बन गए। लेकिन कुछ संपत्तियों का किराया पुराने समझौतों के कारण उसी स्तर पर बना रहा। इससे सरकार को आर्थिक नुकसान होने की बात सामने आती रही है। हलवासिया मार्केट इसका बड़ा उदाहरण है, जहां करीब 10 हजार वर्गमीटर जैसी बड़ी संपत्ति के लिए करीब 700 रुपये मासिक किराये की बात सामने आई है।

अब होगी संपत्तियों की जांच और सूची तैयार

गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद संबंधित जिलों में शत्रु संपत्तियों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। प्रशासन यह देखेगा कि किस संपत्ति पर कौन काबिज है, कब्जे का आधार क्या है और संबंधित व्यक्ति के पास वैध अनुबंध मौजूद है या नहीं। इसके बाद अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। वहीं वैध किरायेदारों और लीजधारकों को उनकी मौजूदा अनुबंध अवधि पूरी होने तक समय दिया जाएगा। लेकिन अनुबंध खत्म होने के बाद किसी भी तरह का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। सरकार का फोकस अब इन संपत्तियों को लंबे समय तक पुराने किराये या लीज व्यवस्था में रखने के बजाय उन्हें अपने नियंत्रण में लेकर व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर है।

नीलामी से सरकार को मिल सकता है बड़ा आर्थिक लाभ

शत्रु संपत्तियों की नीलामी से सरकार को आर्थिक रूप से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। खासतौर पर वे संपत्तियां जो बड़े शहरों के प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित हैं, उनकी मौजूदा बाजार कीमत काफी अधिक हो सकती है। सरकार का मानना है कि बेशकीमती जमीन और संपत्तियों को बेहद कम किराये पर लंबे समय तक दिए रखने के बजाय उनकी वास्तविक आर्थिक क्षमता का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

नीलामी की प्रक्रिया संपत्ति की कानूनी स्थिति और संबंधित नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। कुल मिलाकर, गृह मंत्रालय का यह फैसला उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की हजारों शत्रु संपत्तियों की पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि जिलों में जांच कितनी तेजी से होती है, अवैध कब्जों पर किस तरह कार्रवाई की जाती है और लीज खत्म होने वाली बड़ी संपत्तियों को नीलामी के लिए कब तक आगे बढ़ाया जाता है।

@Nation27

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Written by
Sonu Singh

सोनू सिंह पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में है। इस दौरान सहारा समय, टोटल टीवी, न्यूज नेशन और जागरण डॉट के साथ जुड़कर कार्य कर चुके है। वर्तमान में नेशन 27 में डिजिटल टीम का हिस्सा है।

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