वृंदावन: ठाकुर बांकेबिहारी के भक्तों के लिए दर्शन व्यवस्था में एक बार फिर बदलाव हुआ है। गर्मी के मौसम में ठाकुरजी को शीतलता देने के लिए मंदिर में पिछले कई महीनों से फूलबंगला सजाए जा रहे थे। पुरुषोत्तम मास के कारण इस बार करीब पांच महीने तक यह सेवा चली। इस दौरान ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के जगमोहन में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे थे। अब पांच महीने बाद ठाकुरजी ने फिर से मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देना शुरू कर दिया है। अगले वर्ष फूलबंगला सेवा शुरू होने तक दर्शन की यही व्यवस्था रहने की उम्मीद है।
जगमोहन से हर ओर से हो रहे थे दर्शन
फूलबंगला सेवा के दौरान ठाकुरजी के जगमोहन में विराजमान होने से मंदिर के प्रांगण में मौजूद श्रद्धालुओं को अपेक्षाकृत दूर से भी आराध्य के दर्शन हो जाते थे। मंदिर के अलग-अलग हिस्सों से भक्तों को ठाकुरजी की एक झलक मिल जाती थी। अब गर्भगृह में विराजमान होने के कारण दर्शन का दायरा पहले की तुलना में सीमित हो गया है। गर्भगृह छोटा होने की वजह से मंदिर में मौजूद हर श्रद्धालु को सीधे ठाकुरजी के दर्शन कर पाना आसान नहीं होगा।
रेलिंग व्यवस्था से भक्तों को मिल रहे दर्शन
दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर की उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति की ओर से रेलिंग लगाई गई है। इसी रेलिंग मार्ग से होकर श्रद्धालु आगे बढ़ते हैं और गर्भगृह के सामने पहुंचकर ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन कर पाते हैं। इस व्यवस्था के चलते भीड़ को नियंत्रित करने के साथ भक्तों की दर्शन यात्रा लगातार आगे बढ़ती रहती है। हालांकि अब श्रद्धालुओं को पहले की तरह मंदिर के प्रांगण के हर छोर से ठाकुरजी के दर्शन नहीं मिल पाएंगे।
भक्तों को रखना होगा धैर्य
ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन के लिए वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बड़ी रहती है। ऐसे में गर्भगृह में दर्शन व्यवस्था लागू होने के बाद भक्तों को भीड़ के बीच धैर्य रखते हुए निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ना होगा। मंदिर प्रबंधन की ओर से की गई रेलिंग व्यवस्था का उद्देश्य भीड़ को व्यवस्थित रखते हुए अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को आराध्य के दर्शन कराना है।
फूलबंगला सेवा के दौरान पांच महीने तक जगमोहन से दर्शन देने के बाद अब ठाकुर बांकेबिहारी अपने गर्भगृह में लौट आए हैं। भक्तों के लिए यह बदलाव भले ही दर्शन के दायरे को सीमित करता हो, लेकिन आराध्य के दर्शन की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है।


