रांची: सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच छात्र नेता Devendra Nath Mahto ने 16 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। उन्होंने रांची के अस्पताल में राज्य सरकार के मंत्रियों की मौजूदगी में अनशन तोड़ा। पिछले हफ्ते तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, भूख हड़ताल खत्म होने के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक देश की प्रमुख जांच एजेंसी कथित तौर पर हुई गड़बड़ियों की जांच शुरू नहीं करती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
25 जुलाई से शुरू हुआ था प्रदर्शन
सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं ने 25 जुलाई से प्रदर्शन शुरू किया था। Devendra Nath Mahto इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों और अनियमितताओं का सीधा असर उन लाखों युवाओं पर पड़ता है, जो सालों तक तैयारी करने के बाद सरकारी नौकरी की परीक्षा देते हैं। छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
अस्पताल में बिगड़ी थी तबीयत
लगातार 16 दिन तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण Devendra Nath Mahto की तबीयत बिगड़ गई थी। हालत खराब होने के बाद उन्हें रांची के अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। इसके बाद राज्य सरकार के मंत्री अस्पताल पहुंचे। उनकी मौजूदगी में महतो ने अपना अनशन खत्म किया। भूख हड़ताल खत्म होने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
‘अनशन खत्म, आंदोलन नहीं’
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि Devendra Nath Mahto का अनशन खत्म होना आंदोलन का अंत नहीं है। उनकी मुख्य मांग अभी भी जांच से जुड़ी हुई है। छात्रों की मांग है कि कथित परीक्षा गड़बड़ियों की जांच देश की प्रमुख जांच एजेंसी से कराई जाए। उनका कहना है कि जब तक इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक वे प्रदर्शन जारी रखेंगे। युवाओं के बीच यह मुद्दा इसलिए भी बड़ा है क्योंकि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले उम्मीदवार कई साल अपनी पढ़ाई और कोचिंग पर लगा देते हैं। परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर उन्हें दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
सरकारी नौकरी के लिए लाखों युवा करते हैं तैयारी
भारत में सरकारी नौकरी को आज भी बड़ी संख्या में युवा सुरक्षित करियर के तौर पर देखते हैं। नौकरी में स्थिरता, नियमित आय और दूसरी सुविधाओं के कारण हर साल लाखों उम्मीदवार अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं। कई युवा स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर देते हैं। इसके लिए वे कोचिंग लेते हैं, मॉक टेस्ट देते हैं और कई-कई साल तक एक ही परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया की तैयारी करते रहते हैं।
हर भर्ती परीक्षा उनके लिए सिर्फ एक पेपर नहीं होती। इसमें उनके कई साल की मेहनत, पैसा और भविष्य जुड़ा होता है। ऐसे में पेपर, रिजल्ट, भर्ती प्रक्रिया या परीक्षा संचालन में किसी भी तरह की गड़बड़ी की शिकायत सामने आने पर छात्रों में नाराजगी बढ़ना स्वाभाविक है।
अब आगे क्या?
Devendra Nath Mahto ने 16 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल तो खत्म कर दी है, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं। उनका कहना है कि सरकार को सिर्फ अनशन खत्म कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच भी करानी चाहिए।
नजर इस बात पर है कि सरकार प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों पर आगे क्या कदम उठाती है। दूसरी तरफ, प्रदर्शनकारियों ने भी संकेत दिया है कि जांच शुरू होने तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है। यानी 16 दिन का अनशन खत्म हुआ है, लेकिन सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।


