Rajnath-Koizumi: नई दिल्ली में भारत और जापान के बीच आज एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी कई बड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उनकी बातचीत का मुख्य फोकस रक्षा सौदों, रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा, हिंद-प्रशांत की स्थिति और भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने पर केंद्रित होगा।
यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और जापान लगातार करीब आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी से चीन पहले ही चिंता जाहिर कर चुका है। इसलिए, राजनाथ सिंह और कोइज़ुमी की बातचीत को बीजिंग भी करीब से देख रहा होगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बातचीत का मुख्य उद्देश्य भारत-जापान के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। दोनों देश रणनीतिक भरोसा बढ़ाने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और आने वाले समय में रक्षा सहयोग का रोडमैप तैयार करने पर बात करेंगे। मेक इन इंडिया और रक्षा तकनीक के ट्रांसफर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुंबई में भारतीय नौसेना की ताकत देख चुके हैं कोइज़ुमी
जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने हाल ही में मुंबई में भारतीय नौसेना की ताकत का जायजा लिया। उन्होंने भारतीय नौसेना की क्षमताओं के बारे में जानकारी ली और स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस चेन्नई का निरीक्षण किया। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते नौसैनिक सहयोग की तस्वीर पेश करता है।
चीन ने पहले ही जता दी थी नाराजगी
भारत और जापान की बढ़ती नजदीकी से चीन की चिंता नई नहीं है। जुलाई में भारत और जापान के बीच शिखर बैठक के बाद बीजिंग ने साफ कहा था कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग किसी तीसरे देश को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। चीन ने छोटे और खास गुटों को लेकर भी आपत्ति जताई थी।
भारत और जापान के रिश्ते अब रक्षा सहयोग से काफी आगे निकल चुके हैं। दोनों देश दुर्लभ खनिज, ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी साथ काम कर रहे हैं। दुर्लभ खनिज आज की टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और कई हाई-टेक उत्पादों में इनकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में इन संसाधनों की सप्लाई को सुरक्षित रखना भारत और जापान दोनों के लिए जरूरी है।
हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते असर के बीच बढ़ रही दोस्ती
हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते असर के बीच भारत और जापान की दोस्ती बढ़ रही है। दोनों देशों ने पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर चिंता जताई है। दोनों का कहना है कि किसी भी देश को ताकत के दम पर मौजूदा स्थिति बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। भारत और जापान अपनी साझेदारी को किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन के तौर पर पेश नहीं करते। दोनों खुले और नियम आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बात करते हैं।
भारत-जापान की साझेदारी चीन के लिए क्यों मायने रखती है?
भारत-जापान की साझेदारी चीन के लिए क्यों मायने रखती है? चीन हिंद-प्रशांत में पहले से एक बड़ी सैन्य और आर्थिक ताकत है। भारत और जापान दोनों की अपनी-अपनी रणनीतिक ताकत है। ऐसे में अगर दोनों देश रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा और सैन्य सहयोग को और बढ़ाते हैं, तो क्षेत्र का रणनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। भारत के पास हिंद महासागर में मजबूत भौगोलिक स्थिति और बड़ी नौसैनिक क्षमता है। वहीं जापान की समुद्री सुरक्षा और तकनीकी क्षमता काफी मजबूत है। दोनों देशों का सहयोग बढ़ने पर हिंद-प्रशांत में उनकी सामूहिक क्षमता भी बढ़ेगी। यही वजह है कि बीजिंग इस रिश्ते को हल्के में नहीं ले रहा।
भारत के लिए जापान क्यों जरूरी?
भारत के लिए जापान एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है। दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, निवेश और इंडस्ट्री में भी जापान भारत के साथ लंबे समय से काम कर रहा है। अब रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग का दायरा बढ़ रहा है। भारत की कोशिश है कि देश में ज्यादा से ज्यादा रक्षा उपकरण बनें और विदेशी तकनीक के साथ घरेलू क्षमता भी मजबूत हो। जापान के साथ सहयोग इस दिशा में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है।
आज की बैठक से क्या निकलता है, इस पर सभी की नजरें होंगी
राजनाथ सिंह और शिंजिरो कोइज़ुमी की बातचीत से कई मुद्दों पर आगे की दिशा साफ हो सकती है। खासकर रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत में सहयोग को लेकर दोनों देश क्या फैसला लेते हैं, यह देखने वाली बात होगी। एक तरफ भारत और जापान अपने रिश्तों को मजबूत करने में जुटे हैं। दूसरी तरफ चीन लगातार ऐसे क्षेत्रीय सहयोग को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर रहा है। इस लिहाज से आज की राजनाथ-कोइज़ुमी वार्ता सिर्फ एक नियमित रक्षा बैठक नहीं है। इससे आने वाले दिनों में भारत-जापान के रक्षा रिश्तों और हिंद-प्रशांत की रणनीतिक तस्वीर को लेकर बड़ा संकेत मिल सकता है।


