मेरठ: समाजवादी पार्टी के दो नेताओं दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने मेरठ पुलिस पर हिरासत के दौरान गंभीर मारपीट और अभद्रता के आरोप लगाए हैं। दोनों नेताओं का कहना है कि ललिता गौतम प्रकरण को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद उन्हें एसएसपी कार्यालय बुलाया गया, जहां उनके साथ कथित तौर पर करीब डेढ़ घंटे तक मारपीट की गई। दिग्विजय भाटी ने मीडिया के सामने अपनी आपबीती बताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें जूते, घूंसे और लातों से पीटा गया। इतना ही नहीं, उन्होंने ‘चोली के पीछे क्या है’ गाने पर डांस कराने का भी दावा किया।
इन आरोपों के सामने आने के बाद मेरठ की सियासत गरमा गई है। सपा नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शुक्रवार को सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान समेत पार्टी के कई नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ मीडिया के सामने पहुंचे और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
एसएसपी कार्यालय में बुलाने का दावा
दिग्विजय भाटी के मुताबिक, ललिता गौतम प्रकरण को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद उन्हें और मोहित जाटव को एसएसपी कार्यालय बुलाया गया था। उनका कहना है कि जब वे वहां पहुंचे, उस समय एसएसपी कार्यालय में मौजूद नहीं थे। करीब पांच मिनट बाद एसएसपी अविनाश पांडेय के आने के बाद दोनों को उनके कमरे में बुलाया गया। दिग्विजय का दावा है कि शुरुआत में उन्हें सोफे पर बैठाया गया, लेकिन इसके बाद माहौल अचानक बदल गया। आरोप है कि उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और फिर मारपीट शुरू कर दी गई।
डेढ़ घंटे तक पीटने का आरोप
दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया कि उनके और मोहित जाटव के साथ करीब डेढ़ घंटे तक मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान जूतों, घूंसों और लातों से उन्हें पीटा गया। दिग्विजय के मुताबिक, मारपीट के दौरान उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया जिसे याद करके भी वह भावुक हो गए। उन्होंने मीडिया के सामने रोते हुए आरोप लगाया कि उन्हें और मोहित को अपमानित करने के लिए एक गाने पर डांस करने के लिए मजबूर किया गया।
‘चोली के पीछे क्या है’ गाने पर डांस कराने का दावा
दिग्विजय भाटी का सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर ‘चोली के पीछे क्या है’ गाना चलाया और दोनों नेताओं से उस पर डांस कराया। उन्होंने दावा किया कि एक इंस्पेक्टर गाना गा रहा था और दोनों को डांस करने के लिए मजबूर किया गया। उनका कहना है कि इस दौरान लगातार उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज भी की जाती रही। हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल सपा नेताओं के दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
आंख पर लात मारने का भी आरोप
दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उनकी आंख पर लात मारी गई। उनका कहना है कि पुलिसकर्मी के जूते की एड़ी सीधे उनकी आंख पर लगी। उन्होंने दावा किया कि इस घटना के बाद उनकी आंख में गंभीर दर्द हुआ। मीडिया के सामने दिग्विजय ने अपनी चोट और कथित पुलिस ज्यादती का जिक्र करते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि पुलिसकर्मियों ने वास्तव में ऐसा किया है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
उल्टा लटकाकर पीटने का भी आरोप
दिग्विजय और मोहित की ओर से पुलिस पर सिर्फ सामान्य मारपीट के आरोप ही नहीं लगाए गए हैं। दोनों ने कथित तौर पर उन्हें उल्टा लटकाकर पीटने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की बात भी कही है। इन आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। सपा नेताओं का कहना है कि कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए।
एडीजी भानु भास्कर से मिले सपा नेता
मामले को लेकर सपा नेताओं ने एडीजी भानु भास्कर से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के सामने अपनी बात रखते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की। सपा नेताओं का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि एसएसपी कार्यालय में उस दौरान वास्तव में क्या हुआ था। उन्होंने आरोपों की जांच के साथ-साथ कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाने की मांग की है।
सवालों के घेरे में पूरा मामला
दिग्विजय भाटी के सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एसएसपी कार्यालय में उस दिन आखिर हुआ क्या था? क्या वास्तव में दोनों नेताओं के साथ इतनी बर्बरता हुई या फिर मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही साफ हो पाएगा। दिग्विजय भाटी ने जिस तरह मीडिया के सामने अपनी बात रखी, उसके बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। सपा नेताओं ने पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल एडीजी से जांच की मांग किए जाने के बाद सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है।


