जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क और उसके मददगारों पर शिकंजा कसने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी की टीमों ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से कुपवाड़ा और अनंतनाग जिलों में कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई कथित ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क से जुड़े मामले की जांच के तहत की गई है।
सुबह-सुबह अलग-अलग इलाकों में जांच एजेंसी की टीमों के पहुंचने से स्थानीय स्तर पर हलचल बढ़ गई। अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी के दौरान संदिग्धों से जुड़े दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य संभावित सबूतों की जांच की जा रही है। एजेंसी का फोकस यह पता लगाने पर है कि आतंकी संगठनों के लिए स्थानीय स्तर पर किस तरह मदद पहुंचाई जा रही थी और इस नेटवर्क से कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।
अनंतनाग में तीन ठिकानों पर तलाशी
अनंतनाग जिले में NIA ने तीन अलग-अलग स्थानों को जांच के दायरे में लिया। यह कार्रवाई FIR No. RC/2026/02 से जुड़ी जांच के तहत की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 23, आर्म्स एक्ट की धारा 7/25 और विस्फोटक अधिनियम की धारा 4 के तहत जांच चल रही है।
जांच एजेंसी की टीमों ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर संबंधित परिसरों की तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान घरों और अन्य ठिकानों पर मौजूद सामान की जांच की गई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी जांच के लिए अपने कब्जे में लिया गया।
सुहैल गनी भट के घर से मोबाइल फोन जब्त
अधिकारियों के मुताबिक, क्रेरी शाहाबाद डूरू में NIA की टीम ने सुहैल गनी भट, पुत्र अब्दुल गनी भट के आवास पर तलाशी ली। जांच के दौरान एजेंसी ने एक Redmi 9A मोबाइल फोन जब्त किया है। अब इस मोबाइल फोन की जांच की जाएगी। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि फोन में मौजूद बातचीत, संपर्क, डिजिटल जानकारी या अन्य डेटा का मामले से कोई संबंध है या नहीं। किसी भी डिजिटल डिवाइस से मिली जानकारी की जांच के बाद ही उसके महत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
SICOP बिजबेहरा में भी पहुंची जांच टीम
इसके बाद NIA की टीम ने SICOP बिजबेहरा इलाके में गुलाम नबी हजाम, पुत्र गुलाम रसूल हजाम के आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के अनुसार, गुलाम नबी हजाम पर ड्रग्स तस्करी से जुड़े होने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित ड्रग्स और आतंकवाद के बीच संभावित आर्थिक कनेक्शन को लेकर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं नशीले पदार्थों की तस्करी से जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल किसी आतंकी गतिविधि या प्रतिबंधित नेटवर्क को आर्थिक मदद देने के लिए तो नहीं किया गया।
ड्रग्स-टेरर लिंक पर भी नजर
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इस बात की जांच करती रही हैं कि नशीले पदार्थों की तस्करी से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए तो नहीं किया जा रहा। ऐसे मामलों में एजेंसियां केवल हथियारों या आतंकियों से सीधे संपर्क की जांच तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पैसे के लेनदेन और स्थानीय मददगारों के नेटवर्क को भी खंगालती हैं।
इसी कड़ी में NIA की मौजूदा कार्रवाई को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, छापेमारी के दौरान क्या-क्या अन्य सामग्री मिली है और उसका मामले से क्या संबंध है, इस बारे में जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
OGW नेटवर्क की भूमिका की हो रही जांच
जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के लिए स्थानीय स्तर पर मदद पहुंचाने वाले लोगों को आमतौर पर ओवर ग्राउंड वर्कर यानी OGW के तौर पर जांच के दायरे में लिया जाता है। ऐसे लोगों की भूमिका कथित तौर पर जानकारी पहुंचाने, लॉजिस्टिक मदद देने, संपर्क स्थापित कराने या अन्य तरह की सहायता से जुड़ी हो सकती है।
NIA की मौजूदा जांच में भी एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संदिग्ध नेटवर्क की संरचना क्या थी और इसके संपर्क किन लोगों से थे। जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य संभावित सबूतों के जरिए इन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
कुपवाड़ा में भी एक साथ कार्रवाई
अनंतनाग के अलावा कुपवाड़ा जिले में भी NIA की टीमों ने कई स्थानों पर तलाशी ली। दोनों जिलों में एक साथ कार्रवाई किए जाने से माना जा रहा है कि जांच एजेंसी अलग-अलग स्थानों पर मौजूद संभावित संपर्कों और नेटवर्क की कड़ियों को एक साथ खंगाल रही है।
तलाशी अभियान के दौरान स्थानीय पुलिस और सुरक्षा तंत्र की मौजूदगी भी रही। जिन परिसरों में कार्रवाई की गई, वहां दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सामान समेत अन्य संभावित सबूतों की जांच की गई।
आगे की जांच से खुल सकते हैं कई राज
NIA की इस कार्रवाई के बाद अब जब्त किए गए मोबाइल फोन और अन्य संभावित सामग्री की फोरेंसिक जांच अहम मानी जा रही है। डिजिटल डिवाइस से मिले डेटा के आधार पर एजेंसी को संदिग्धों के संपर्कों, बातचीत और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद हो सकती है।
फिलहाल एजेंसी की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तलाशी के दौरान कुल कितनी सामग्री बरामद या जब्त हुई है और कितने लोगों से पूछताछ की गई है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और नाम सामने आने या अन्य ठिकानों पर कार्रवाई होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
NIA की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सुरक्षा एजेंसियां जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क के साथ-साथ उसके स्थानीय मददगारों और संभावित फंडिंग चैनलों पर भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। शनिवार की कार्रवाई में अनंतनाग और कुपवाड़ा को एक साथ जांच के दायरे में लेने से साफ है कि एजेंसी मामले की कड़ियों को व्यापक स्तर पर खंगाल रही है।


