उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी इलाकों से आ रहे पानी के कारण गंगा समेत कई नदियां उफान पर हैं। प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। वाराणसी, गाजीपुर और कन्नौज समेत कई जिलों में नदी का पानी आबादी और खेतों की ओर बढ़ रहा है। कहीं घरों और रास्तों पर पानी पहुंचने का खतरा है तो कहीं किसानों की महीनों की मेहनत पानी में डूब गई है।
वाराणसी में बदले हालात, सभी 84 घाट गंगा में समाए
वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। शहर के सभी 84 घाट गंगा के बढ़े पानी की चपेट में आ चुके हैं। घाटों की सीढ़ियां और निचले हिस्से पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। सामान्य दिनों में जहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ नजर आती थी, वहां अब पानी का कब्जा है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। कई प्रमुख घाटों पर पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए लोगों को ऊपरी हिस्सों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे वाराणसी में बाढ़ की स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मणिकर्णिका घाट पर छत से हो रहा अंतिम संस्कार
गंगा के बढ़ते पानी का सबसे भावुक असर मणिकर्णिका घाट पर दिखाई दे रहा है। घाट का निचला हिस्सा पानी में डूब जाने के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था ऊपर की ओर करनी पड़ रही है। कई मामलों में छत पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। मणिकर्णिका घाट का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद बड़ा है। यहां सामान्य परिस्थितियों में लगातार अंतिम संस्कार होते हैं, लेकिन गंगा के उफान ने पूरी व्यवस्था को बदल दिया है। पानी बढ़ने के कारण लोगों को मजबूरी में वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
परिजनों के लिए यह स्थिति पहले से ही दुख की घड़ी को और कठिन बना रही है। अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भी जलभराव और बढ़ते पानी के बीच काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दशाश्वमेध घाट पर छत से हो रही गंगा आरती
वाराणसी की पहचान मानी जाने वाली दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती भी गंगा के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित हुई है। घाट का बड़ा हिस्सा पानी में डूबने के कारण आरती की व्यवस्था ऊपरी हिस्से और छत पर करनी पड़ रही है। हर शाम होने वाली गंगा आरती देखने के लिए देश-विदेश से लोग वाराणसी पहुंचते हैं। लेकिन इस समय नदी का पानी घाटों तक पहुंच जाने के कारण व्यवस्था सामान्य दिनों से काफी अलग नजर आ रही है। धार्मिक परंपराओं को जारी रखने के लिए आयोजकों को परिस्थितियों के अनुसार इंतजाम बदलने पड़ रहे हैं।
गाजीपुर में खेतों तक पहुंचा गंगा का पानी
गाजीपुर में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नदी का पानी तटवर्ती इलाकों के खेतों तक पहुंच गया है। इससे करीब 230 बीघा फसल जलमग्न होने की जानकारी सामने आई है। किसानों के लिए यह स्थिति किसी बड़ी चिंता से कम नहीं है। खेतों में खड़ी फसल लंबे समय तक पानी में डूबी रही तो उसके खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। जिन किसानों ने महीनों मेहनत और खर्च के बाद फसल तैयार की थी, उनके सामने अब नुकसान का डर खड़ा हो गया है। ग्रामीण इलाकों में लोग नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। पानी बढ़ने की स्थिति में खेतों के साथ-साथ आबादी वाले क्षेत्रों में भी खतरा बढ़ सकता है।
कन्नौज के तटवर्ती गांवों पर भी मंडराया खतरा
कन्नौज में गंगा का पानी तटवर्ती गांवों की ओर बढ़ रहा है। इससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को संभावित बाढ़ की आशंका सताने लगी है। ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता घरों, पशुओं और खेती की है। यदि पानी और बढ़ता है तो गांवों के संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की जरूरत पड़ सकती है। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
सिर्फ नदी किनारे के इलाके ही नहीं, खेती पर भी असर
गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर केवल नदी के आसपास रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं है। बाढ़ का पानी खेतों में पहुंचने से कृषि व्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ रहा है। फसल के लंबे समय तक पानी में रहने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में खेती बड़ी संख्या में परिवारों की आय का मुख्य आधार है। ऐसे में बाढ़ का पानी सिर्फ खेत नहीं डुबोता, बल्कि किसानों की उम्मीद और उनकी पूरी मेहनत पर भी असर डालता है।
लोगों की निगाहें अब जलस्तर पर
लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच तटवर्ती इलाकों के लोगों की नजर अब नदी के पानी पर टिकी हुई है। लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले समय में पानी और कितना बढ़ सकता है और क्या उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत पड़ेगी। वाराणसी में जहां गंगा का उफान धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की व्यवस्था बदल रहा है, वहीं गाजीपुर और कन्नौज में इसका सीधा असर गांवों और खेती पर दिखाई दे रहा है।
ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षा, प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था और जलस्तर पर लगातार निगरानी बनाए रखना है। गंगा का पानी जिस तरह लगातार नए इलाकों की ओर बढ़ रहा है, उससे आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी हुई है। फिलहाल तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्क रहना सबसे जरूरी है।


