देहरादून: उत्तराखंड में युवाओं के नए और इनोवेटिव आइडिया को सिर्फ कागज तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कारोबार का रूप देने की दिशा में सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। प्रदेश सरकार ने नवाचार पर आधारित 10 नए आइडिया का स्टार्टअप के रूप में चयन किया है। इन आइडिया को आगे बढ़ाने वाले युवाओं को सरकार की ओर से दो-दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी।
सरकार का मकसद प्रदेश के युवाओं को नौकरी तलाशने वाले की जगह रोजगार देने वाला बनाने के साथ-साथ राज्य में स्टार्टअप का मजबूत माहौल तैयार करना है। इसके लिए उद्योग विभाग की मदद से अलग-अलग जिलों में उच्च शिक्षण संस्थानों में बूट कैंप आयोजित किए गए, जहां युवाओं को अपने बिजनेस और इनोवेशन आइडिया पेश करने का मौका मिला।
बूट कैंप के जरिए सामने आए नए आइडिया
राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए जिलास्तर पर युवाओं से नए विचार और कारोबार से जुड़े आइडिया आमंत्रित किए गए। उच्च शिक्षण संस्थानों में आयोजित बूट कैंप के दौरान युवाओं को अपने आइडिया को विशेषज्ञों के सामने रखने और उसे व्यावसायिक रूप देने की प्रक्रिया समझाई गई।
इन कार्यक्रमों में ऐसे आइडिया पर खास ध्यान दिया गया, जिनमें नवाचार के साथ-साथ रोजगार पैदा करने और स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान करने की क्षमता दिखाई दी। इसी प्रक्रिया के बाद 10 युवाओं के आइडिया का चयन स्टार्टअप के रूप में किया गया है।
चयनित युवाओं को मिलेंगे दो लाख रुपये
चयनित 10 युवाओं को प्रदेश सरकार की ओर से दो-दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। यह आर्थिक सहायता युवाओं के लिए अपने आइडिया को शुरुआती स्तर पर विकसित करने और उसे कारोबार में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सरकार की कोशिश है कि युवाओं के पास अगर कोई बेहतर और व्यावहारिक आइडिया है तो पैसों की कमी के कारण वह शुरुआत में ही बंद न हो जाए। शुरुआती आर्थिक मदद के जरिए उन्हें अपने प्रोजेक्ट पर काम करने, प्रोटोटाइप तैयार करने और बाजार की जरूरतों के हिसाब से अपने उत्पाद या सेवा को विकसित करने का अवसर मिलेगा।
उत्तराखंड में बढ़ रहा स्टार्टअप का दायरा
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप को लेकर युवाओं की दिलचस्पी बढ़ी है। खासकर शिक्षा संस्थानों से निकलने वाले युवा अब पारंपरिक नौकरी के विकल्पों के साथ अपना कारोबार शुरू करने और नए बिजनेस मॉडल पर काम करने में भी रुचि दिखा रहे हैं। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अभी तक 219 स्टार्टअप को प्रदेश सरकार से मान्यता मिल चुकी है। वहीं केंद्र सरकार के स्टार्टअप पोर्टल पर उत्तराखंड के 1500 से अधिक युवा स्टार्टअप के रूप में पंजीकृत हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य में उद्यमिता को लेकर युवाओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय जरूरतों से जुड़े आइडिया पर जोर
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में स्टार्टअप के लिए संभावनाएं काफी अलग हैं। पर्यटन, कृषि, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, तकनीक और पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार जैसे कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां नए आइडिया के जरिए बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। सरकार की ओर से आयोजित बूट कैंप का एक उद्देश्य यह भी है कि युवा अपने आसपास की समस्याओं को पहचानें और उनके समाधान के लिए व्यावहारिक बिजनेस मॉडल तैयार करें। इससे एक तरफ स्थानीय समस्याओं का समाधान हो सकता है, वहीं दूसरी तरफ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश
उत्तराखंड से बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों और शहरों का रुख करते हैं। ऐसे में सरकार स्टार्टअप और स्वरोजगार को बढ़ावा देकर युवाओं को अपने ही राज्य में अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। सरकार का मानना है कि अगर युवाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे अपने आइडिया को सफल कारोबार में बदल सकते हैं। इससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
आगे भी जारी रहेंगे ऐसे प्रयास
10 नए स्टार्टअप आइडिया का चयन इसी दिशा में उठाया गया एक कदम माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं तक स्टार्टअप से जुड़ी योजनाओं और अवसरों की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा अपने इनोवेटिव आइडिया के साथ आगे आ सकें।
प्रदेश में पहले से मान्यता प्राप्त 219 स्टार्टअप और केंद्र के पोर्टल पर पंजीकृत 1500 से अधिक स्टार्टअप इस बात का संकेत हैं कि उत्तराखंड में स्टार्टअप संस्कृति धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। अब सरकार के सामने चुनौती इन आइडिया को सिर्फ पंजीकरण तक सीमित न रखते हुए उन्हें सफल और टिकाऊ कारोबार में बदलने की है। इसके लिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ मेंटरशिप, बाजार और तकनीकी सहयोग भी युवाओं के लिए अहम साबित होगा।


