प्रतापगढ़: प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर सोमवार की भोर अचानक सड़क का एक हिस्सा धंस जाने से हड़कंप मच गया। घटना नवाबगंज क्षेत्र में बरई का पुरवा के पास हुई, जहां सड़क के नीचे जमीन में गहरा गड्ढा बन गया और देखते ही देखते हाईवे का एक हिस्सा नीचे बैठ गया। जिस समय सड़क धंसी, उस वक्त वहां से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था। यही वजह रही कि बड़ा हादसा होने से बच गया।
सड़क धंसने की सूचना मिलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर सड़क के धंसे हिस्से को देखा तो नीचे गहरा गड्ढा नजर आ रहा था। हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर इस तरह सड़क बैठने की घटना ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और उसके रखरखाव पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
भोर में अचानक धंस गई सड़क
बताया जा रहा है कि सोमवार तड़के बरई का पुरवा के पास हाईवे पर अचानक जमीन धंसने लगी। कुछ ही देर में सड़क का एक हिस्सा नीचे बैठ गया। सड़क के बीचों-बीच बने गड्ढे को देखकर राहगीर भी सतर्क हो गए। गनीमत रही कि सड़क धंसने के समय कोई बाइक सवार, कार या बड़ा वाहन उस हिस्से से नहीं गुजर रहा था। अगर उस वक्त कोई वाहन वहां से निकल रहा होता तो गंभीर हादसा हो सकता था। खासकर रात और भोर के समय हाईवे पर वाहनों की रफ्तार अधिक रहती है, ऐसे में सड़क के अचानक धंसने से वाहन चालक को संभलने का मौका भी नहीं मिलता।
करीब एक साल पहले बना था फोरलेन
प्रयागराज-लखनऊ मार्ग के इस हिस्से को करीब एक साल पहले फोरलेन में तब्दील किया गया था। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) के लखनऊ से प्रयागराज वाले हिस्से में फोरलेन का काम महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए तेजी से कराया गया था। सड़क के चौड़ीकरण और निर्माण के बाद लोगों को उम्मीद थी कि इससे यातायात सुगम होगा और सफर सुरक्षित बनेगा।
लेकिन निर्माण के करीब एक साल के भीतर ही हाईवे का हिस्सा धंस जाने से अब निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी कम अवधि में सड़क का इस तरह बैठ जाना सामान्य नहीं माना जा सकता।
ग्रामीणों ने निर्माण को लेकर लगाए गंभीर आरोप
आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि बरई का पुरवा के पास जमीन के नीचे पहले से गहरा गड्ढा मौजूद था। उनका कहना है कि निर्माण के दौरान इस गड्ढे को पूरी तरह भरने और जमीन को मजबूत करने के बजाय उसके ऊपर अस्थायी तरीके से डामर डालकर सड़क तैयार कर दी गई।
ग्रामीणों के मुताबिक, उस समय सड़क निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा था। महाकुंभ के मद्देनजर सड़क को जल्द तैयार करने का दबाव भी था। ऐसे में कुछ स्थानों पर जमीन की मजबूती और जल निकासी जैसे पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि, ग्रामीणों के इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सड़क धंसने की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बारिश के बाद जमीन के अंदर बढ़ा पानी?
इन दिनों प्रतापगढ़ और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। माना जा रहा है कि बारिश का पानी सड़क के नीचे मौजूद गड्ढे या कमजोर हिस्से तक पहुंचा होगा। पानी के कारण जमीन के भीतर की मिट्टी खिसकने या कमजोर होने से सड़क के नीचे खाली जगह बन सकती है। इसी वजह से ऊपर बनी सड़क का भार संभालना मुश्किल हुआ और सड़क का एक हिस्सा अचानक नीचे बैठ गया।
हालांकि, यह सिर्फ प्रारंभिक आशंका है। सड़क धंसने की असली वजह क्या रही, क्या वहां पहले से कोई भूमिगत गड्ढा था, बारिश का पानी किस तरह नीचे पहुंचा और निर्माण के समय उस हिस्से की मिट्टी को किस तरह मजबूत किया गया था—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी होगी।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
एक साल के भीतर हाईवे के धंसने की घटना ने निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर फोरलेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट में सड़क के नीचे की जमीन की जांच, उसकी मजबूती, जल निकासी और बेस लेयर की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
ऐसे में अगर किसी हिस्से के नीचे गहरा गड्ढा मौजूद था और उसके ऊपर सड़क बना दी गई, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है। वहीं, अगर सड़क निर्माण के समय सभी मानकों का पालन किया गया था, तो फिर इतनी जल्दी सड़क धंसने के पीछे की तकनीकी वजह सामने लाना भी जरूरी है।
बड़े हादसे का मंडरा रहा था खतरा
प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर दिन-रात बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं। इस मार्ग पर बस, ट्रक, कार और दोपहिया वाहन लगातार आवाजाही करते हैं। ऐसे में सड़क का अचानक धंसना बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता था। अगर कोई तेज रफ्तार वाहन गड्ढे वाले हिस्से में पहुंच जाता तो चालक के लिए वाहन को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता था। इससे न सिर्फ वाहन सवारों की जान खतरे में पड़ती, बल्कि पीछे से आ रहे वाहनों के टकराने की भी आशंका रहती। फिलहाल सबसे राहत की बात यही रही कि सड़क धंसने के वक्त वहां कोई वाहन मौजूद नहीं था और बड़ा हादसा टल गया।
अब जांच और मरम्मत पर टिकी नजर
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क किस वजह से धंसी और निर्माण के समय इस हिस्से में क्या काम किया गया था। जरूरत है कि संबंधित विभाग मौके की तकनीकी जांच कराए और सड़क के नीचे की स्थिति का भी परीक्षण किया जाए। सिर्फ ऊपर से गड्ढा भरकर सड़क की मरम्मत करना पर्याप्त नहीं होगा। अगर नीचे की जमीन कमजोर है या जलभराव की समस्या बनी हुई है, तो दोबारा सड़क धंसने का खतरा बना रहेगा। इसलिए पहले कारण की पहचान, फिर जमीन को मजबूत करने और उसके बाद सड़क की स्थायी मरम्मत की जरूरत होगी।
एक साल पहले तैयार हुए फोरलेन हाईवे के धंसने की यह घटना अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और यदि निर्माण में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।


