नई दिल्ली: नेपाल में तिब्बत सीमा की तरफ से भोटेकोशी नदी में आए फ्लैश फ्लड ने भारी तांडव मचाया है और अब तक 175 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 1500 लोग लापता हैं। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या नेपाल में आई त्रासदी मेड इन चाइना है ?
यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि इस त्रासदी को लेकर नेपाल में पत्रकारों के समूह ने आरोप लगाया कि चीन ने इसकी सही समय पर जानकारी नहीं दी जिसकी वजह से नेपाल को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं उसके कारणों को भी जानना जरूरी है।
ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटने से हादसा
दरअसल अमेरिकी सर्वे में खुलासा हुआ है कि चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत में लैंगटांग लिरुंग पर्वत के उत्तर मुख पर लगभग 5200 मीटर ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूट गया। इसके बाद ये टूटा हुआ हिस्सा करीब 1200 मीटर नीचे घाटी में गिरा जिससे लेंडे खोला नदी का रास्ता रुक गया और वहां एक अस्थायी बांध जैसी स्थिति बन गई।

तिब्बत के ग्लेशियर में आए एवलांच की जानकारी क्यों नहीं दी ?
दबाव की वजह से जब यही अस्थायी बांध जैसा ढांचा टूटा तो पानी, चट्टान, मिट्टी, कीचड़ मलबे की शक्ल में विशाल लहर के साथ नीचे की तरफ तीव्र वेग से बहने लगी। बता दें कि लेंडे खोला नेपाल-चीन सीमा पर रसुवागढ़ी और तिमुरे सीमा पर भोटेकोशी नदी में मिलती है। ग्लेशियर से आए आइस-रॉक एवलांच की वजह से भारी मात्रा में बर्फ, टूटे हुए चट्टान, मिट्टी और मलबा लेन्दे खोला में गिरा और अचानक तेज बहाव की वजह से पूरे इलाके को इस नदी ने मलबे में बदल दिया।
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अब इसी को लेकर नेपाल के पत्रकारों का आरोप है कि अगर चीन ने इस घटना की जानकारी समय रहते नेपाल को दे दी होती तो तबाही को कम किया जा सकता था और लोगों को वहां से पहले ही निकाला जा सकता था।

चीन ने घटना को लेकर क्या सफाई दी
हालांकि अब नेपाली पत्रकारों के इन आरोप पर चीन की सफाई भी सामने आई है। नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट कर ग्यिरोंग रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में आई आपदा पर दुख जताया। उन्होंने आगे लिखा इस हादसे चीन और नेपाल में दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और भारी तबाही हुई है. हालांकि उन्होंने इन आरोपों पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा।
उन्होंने आगे लिखा, इस मुश्किल समय में चीन नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और चीन को भी इससे भारी नुकसान पहुंचा है। उनकी तरफ से आगे कहा गया कि इसके बाद भी बीजिंग ने नेपाल के लिए आपातकालीन राहत और आर्थिक मदद का इंतजाम किया है। उन्होंने कहा कि चीन हरसंभव नेपाल की मदद करेगा और दोनों देश मिलकर स्थिति को सामान्य करने के लिए काम करेंगे।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल


