नई दिल्ली: तिब्बत से नेपाल की भोटेकोशी नदी में आए सैलाब ने अपने सामने आए सभी चीजों को बहा लिया. इस त्रासदी में 270 से ज्यादा लोगों के मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि 1500 लोग अब भी लापता है। इस दौरान नेपाल के तीन सबसे प्रभावित जिलों में लोगों को पलक झपकने तक का मौका नहीं मिला।
कहां कितने लोगों की मौत
नेपाल में अचानक आए इस बाढ़ के बाद चितवन से 64 धादिंग से 27, नवलपरासी पूर्व से 26, गोरखा से 20, नुवाकोट से 12, तनहु से 9, रसुवा से 3, नवलपरासी पश्चिम से 2 शव बरामद किए गए हैं। हालांकि इस त्रासदी ने नेपाल के तीन जिलों रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। इन जिलों में 19 पुल और 40 किलोमीटर सड़के मलबे में बदल चुकी है।
ये भी पढ़ें: क्या नेपाल में आई त्रासदी ‘मेड इन चाइना’ है ? क्यों लग रहे आरोप, अब चीन ने दी सफाई
रसुवा जिले में सबसे पहले आया प्रलय
इस तबाही और बर्बादी की शुरुआत नेपाल के रसुवा जिले से हुई। भोटेकोशी नदी के जरिए आया सैलाब इस जिले के टिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों में आया और चंद सेकेंड में होटल, मकान, दुकान, रेस्टोरेंट, पुल और सड़के मलबे में दफ्न हो गई।
हर तरफ सिर्फ नदी में बहकर आई मिट्टी, पत्थर के टुकड़े और उससे हुई बर्बादी के निशान दिखाई देने लगे। यहां लोगों को पलक झपकने तक का वक्त प्रकृति ने नहीं दिया। हालात इतने बदतर हैं कि रेस्क्यू टीम को भी वहां पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है क्योंकि सड़क संपर्क पूरी तरह खत्म हो चुका है। ल्हामू हाईवे भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है।

नुवाकोट में भोटेकोशी नदी त्रिशूली में मिली
रसुवा में सब बर्बाद करने के बाद फ्लैश फ्लड का पानी तेजी से भोटेकोशी नदी के जरिए नुवाकोट की तरफ बढ़ा जहां त्रिशूली नदी की धारा में मिलकर इसने और विकराल रूप धारण कर दिया। इसके बाद तो जो भी रिहायशी इलाका, मकान, दुकान, आश्रम, मोहल्ले रास्ते में आया सबको इसने मलबे में तब्दील करने में देरी नहीं लगाई।
ये भी पढ़ें: नेपाल में हर तरफ सिर्फ तबाही ही तबाही, 175 की मौत, 1500 लोग लापता, ताबड़तोड़ मदद भेज रहा भारत
बेत्रावती, मैलुड, शांति बाजार और त्रिशूली बाजार जैसे इलाकों में पानी और मलबे ने भारी नुकसान पहुंचाया. नदी किनारे रहने वाला सैकड़ों परिवार को अपना घरबार छोड़कर भागना पड़ा। हालांकि कुछ लोग समय पर घर नहीं छोड़ पाए जिससे उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
धादिंग में सबसे मुश्किल हालात
नुवाकोट के बाद फ्लैश फ्लड ने रौद्र रूप अपना लिया और जब नदी के किनारों को काटा तो कई इलाकों में भूस्खलन शुरू हो गया। इसके कई घर जमींदोज हो गए और सड़कें नदियों में मलबे के रूप में बहने लगी। पुलों को भारी नकुसान पहुंचा और उनका संपर्क दूसरे शहरों और जिलों से पूरी तरह कट गया जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कत आ रही है।

सड़कों के टूट जाने की वजह से राहत सामग्री, दवाइयां और बचाव दल भी समय रहते मौके पर नहीं पहुंच पा रहे हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि जो घर पहले नदी किनारे से काफी दूर हुआ करते थे वो भी अब नदी के बीच में आ गए हैं।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल


