अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच ट्रस्ट ने पूरी प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ की है। ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का चयन किसी अलग या विशेष प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ। उन्होंने भी अन्य उम्मीदवारों की तरह CEO पद के लिए आवेदन किया था और तय प्रक्रिया के तहत उनका आवेदन जांच के बाद आगे बढ़ा। ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के मुताबिक, CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन सभी आवेदनों की छंटनी के बाद 16 उम्मीदवारों को अंतिम चरण के लिए चुना गया। इन्हीं 16 उम्मीदवारों में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र भी शामिल थे। इसके बाद चयन प्रक्रिया के तहत उनका इंटरव्यू लिया गया।
ट्रस्ट ने बताया कि CEO के चयन के लिए 6 जुलाई को एक खोज समिति गठित की गई थी। समिति को इस पद के लिए योग्य उम्मीदवार तलाशने और आवेदनों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन पहुंचे। CEO जैसे अहम पद को लेकर बड़ी संख्या में आवेदन आने के बाद समिति ने सभी आवेदनों की जांच की। योग्यता, अनुभव और पद के लिए निर्धारित आवश्यकताओं के आधार पर उम्मीदवारों की छंटनी की गई। इसी प्रक्रिया के बाद 5,585 आवेदनों में से 16 नाम अंतिम चरण के लिए चुने गए। ट्रस्ट का कहना है कि जितेंद्र मिश्र का नाम भी इसी शॉर्टलिस्ट में शामिल था। यानी उनका चयन सीधे तौर पर नहीं हुआ, बल्कि वह आवेदन से लेकर स्क्रीनिंग और इंटरव्यू तक की प्रक्रिया से गुजरकर अंतिम चरण तक पहुंचे।
ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अंतिम चरण में चुने गए उम्मीदवारों के इंटरव्यू की प्रक्रिया 11 अगस्त को हुई थी। जितेंद्र मिश्र भी इसी इंटरव्यू प्रक्रिया में शामिल हुए थे। ट्रस्ट ने उनके चयन को लेकर सामने आ रही उन चर्चाओं को गलत बताया है, जिनमें यह सवाल उठाया जा रहा था कि उन्हें बिना किसी खुली प्रक्रिया के CEO पद पर नियुक्त किया गया। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि 11 अगस्त को इंटरव्यू की प्रक्रिया हुई थी और इसमें अंतिम चरण के लिए चुने गए उम्मीदवारों को शामिल किया गया। इसके बाद चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
CEO चयन को लेकर ट्रस्ट ने जो जानकारी सामने रखी है, उसके मुताबिक पूरी प्रक्रिया को इस तरह समझा जा सकता है, सबसे पहले CEO पद के लिए आवेदन मांगे गए। इसके बाद कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। इन आवेदनों की स्क्रीनिंग की गई और योग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार की गई। स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवार अंतिम चरण के लिए चुने गए। इसके बाद 11 अगस्त को इंटरव्यू हुआ। ट्रस्ट ने इसी प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा है कि जितेंद्र मिश्र का चयन भी तय प्रक्रिया के तहत ही हुआ। उनके पूर्व पद और अनुभव को लेकर चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन ट्रस्ट के मुताबिक वह भी आवेदन करने वाले अन्य उम्मीदवारों की तरह चयन प्रक्रिया का हिस्सा बने थे।
राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास है। मंदिर निर्माण के साथ-साथ आने वाले समय में मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं, प्रशासनिक कामकाज और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लेकर CEO का पद काफी अहम माना जा रहा है। इसी वजह से इस पद पर नियुक्ति को लेकर सामने आई जानकारी के बाद चर्चा शुरू हुई। सोशल मीडिया और अलग-अलग माध्यमों में चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए। इन सवालों के बीच ट्रस्ट ने अब आवेदन से लेकर इंटरव्यू तक की प्रक्रिया का विवरण सामने रखा है। ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि जितेंद्र मिश्र ने भी CEO पद के लिए आवेदन किया था। उनके आवेदन को अन्य आवेदनों के साथ प्रक्रिया में शामिल किया गया और स्क्रीनिंग के बाद वह अंतिम 16 उम्मीदवारों में पहुंचे।
ट्रस्ट की ओर से दी गई सफाई का मुख्य आधार यही है कि CEO पद पर नियुक्ति किसी व्यक्तिगत पसंद या सीधे चयन का नतीजा नहीं थी। इसके लिए बाकायदा खोज समिति बनाई गई, आवेदन मंगाए गए, बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों की छंटनी हुई और इसके बाद सीमित उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इस पूरे मामले में ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की है कि 5,585 आवेदनों में से 16 उम्मीदवारों का चयन अंतिम चरण के लिए किया गया था, जिसमें जितेंद्र मिश्र का नाम भी शामिल था। इसके बाद 11 अगस्त को उनका इंटरव्यू हुआ। राम मंदिर से जुड़े किसी भी बड़े प्रशासनिक पद पर होने वाली नियुक्ति को लेकर स्वाभाविक तौर पर लोगों की दिलचस्पी रहती है। ऐसे में ट्रस्ट की ओर से चयन प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के बाद अब विवाद के केंद्र में प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को रखा जा रहा है।


