दिल्ली-NCR में सामने आ रही दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। हाल के मामलों पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं हैं, बल्कि इससे यह भी सवाल उठता है कि आम लोगों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से काम कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इन घटनाओं को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हालात को देखते हुए अदालत खुद को 2012 के निर्भया कांड से तुलना करने से रोक नहीं सकती। अदालत की टिप्पणी में दिल्ली और आसपास के इलाकों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता साफ दिखाई दी।
अदालत ने कहा कि दिल्ली-NCR में सामने आए दुष्कर्म के मामलों से कानून लागू करने वाली एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कोर्ट के मुताबिक, ऐसी घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि लोगों को सुरक्षित माहौल देने की जिम्मेदारी निभाने वाली व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामियां हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि नागरिकों को सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और बुनियादी सुरक्षा देना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अगर बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। पुलिस और प्रशासन को अपराध की रोकथाम और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
दिल्ली में दिसंबर 2012 में 23 वर्षीय युवती के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा और यौन अपराधों से जुड़े कानूनों को लेकर देशभर में बड़े स्तर पर चर्चा हुई। आपराधिक कानूनों में बदलाव किए गए और महिलाओं की शिकायतों पर पुलिस की कार्रवाई से लेकर जांच और न्यायिक प्रक्रिया तक कई स्तरों पर सुधारों की बात सामने आई। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का हालिया संदर्भ यह सवाल फिर सामने लाता है कि वर्षों बाद भी महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों को रोकने के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं जमीन पर कितनी असरदार हैं।
अदालत की टिप्पणियों का एक अहम पहलू यह रहा कि महिलाओं की सुरक्षा को सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं किया जा सकता। सुरक्षित माहौल बनाने के लिए पुलिसिंग, सार्वजनिक जगहों पर निगरानी, शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे कई पहलुओं पर एक साथ काम करना जरूरी है। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनके साथ किसी तरह की घटना होने पर पुलिस और प्रशासन तुरंत उनकी मदद के लिए सामने आएगा।
दिल्ली और NCR में महिलाओं के खिलाफ अपराध लंबे समय से सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा रहे हैं। हाल में सामने आए मामलों ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि राजधानी क्षेत्र में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर और क्या कदम उठाए जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिसिंग और प्रशासनिक जवाबदेही पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अदालत की चिंता का केंद्र यही है कि नागरिकों को सिर्फ घटना के बाद न्याय दिलाना ही नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से साफ है कि दिल्ली-NCR में महिलाओं के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों को अदालत महज अलग-अलग आपराधिक घटनाओं के तौर पर नहीं देख रही है, बल्कि इनके पीछे मौजूद व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही के सवालों पर भी नजर रख रही है।
























