आगरा: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित पैतृक आवास के बाहर सोमवार को हुए कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश महासचिव संगठन अनिल यादव और मथुरा कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर भी शामिल हैं। मंगलवार को सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक, यह पूरा मामला आगरा के विजयनगर इलाके का है। सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं का एक समूह मुख्य चुनाव आयुक्त के पैतृक घर के बाहर पहुंचा था। यहां प्रदर्शन के दौरान गेट और दीवारों पर स्प्रे पेंट से आपत्तिजनक नारे लिखे गए। सामने आई तस्वीरों और रिपोर्टों के मुताबिक, दीवार पर ज्ञानेश कुमार को लेकर ‘गद्दार’ और ‘वोट चोर’ जैसे शब्द लिखे गए थे।
आगरा पुलिस का कहना है कि अनिल यादव और मुकेश धनगर अपने साथियों के साथ बिना पूर्व सूचना के विजयनगर की रिहायशी कॉलोनी में पहुंचे। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान वहां हंगामा हुआ, जिससे इलाके की कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। जिस मकान के बाहर प्रदर्शन किया गया, वहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वृद्ध माता-पिता रहते हैं। पुलिस ने इसी बात को देखते हुए घटना को गंभीरता से लिया और प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
घटना के बाद आगरा के हरिपर्वत थाने में पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज किया गया। एफआईआर में कई लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कुछ अन्य लोगों की पहचान जांच के जरिए की जा रही है। पुलिस ने मामले में दंगा, रास्ता रोकने, सरकारी कर्मचारी पर बल प्रयोग, घर में घुसने और धमकी समेत भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद मौके पर मौजूद लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। जांच में शामिल अधिकारियों ने घटनास्थल और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। मामले में पुलिस ने कांग्रेस नेताओं की तलाश शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, अनिल यादव और मुकेश धनगर को पुलिस ने दिल्ली की ओर जाते समय जेवर टोल प्लाजा के पास पकड़ा। इसके बाद पुलिस ने अन्य आरोपियों की भी पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। मंगलवार तक गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या छह पहुंच गई। पुलिस की कार्रवाई के बाद सभी छह आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मामले की जांच अभी जारी है।
यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी की ओर से मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। आगरा में हुआ प्रदर्शन भी इसी व्यापक राजनीतिक विरोध का हिस्सा बताया गया है। आगरा की घटना में पुलिस की कार्रवाई का आधार प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हुई अव्यवस्था और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी शिकायतें हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी है और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
घटना के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के पैतृक आवास और आसपास के इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई। अधिकारियों ने राजनीतिक संगठनों और प्रदर्शनकारियों से तय स्थानों पर ही विरोध करने की अपील की है, ताकि रिहायशी इलाकों में कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। छह आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि प्रदर्शन में कितने लोग शामिल थे और घटना के दौरान किस-किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही।
























