लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली में INDIA ब्लॉक की अहम बैठक हुई जिससे अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) नदारद रहे। इस बैठक में इंटेंसिव रिवीजन यानी की SIR को बंद करने और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाए जाने की मांग पर चर्चा हुई, लेकिन हैरानी की बात ये है कि विपक्षी दलों की इस बैठक में यूपी के सबसे बड़े विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव हिस्सा नहीं लिया।
बैठक में शामिल नहीं हुए अखिलेश
अखिलेश यादव ने इससे किनारा कर लिया और उनकी जगह पार्टी से कोई दूसरा नेता इसमें शामिल हुए। इसके बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अखिलेश इस बैठक में हिस्सा क्यों नहीं लिया ? क्या ये कांग्रेस के साथ कोई प्रेशर पॉलिटिक्स है ताकि यूपी में सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी को कम किया सके या इसके पीछे कोई और वजह है ?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मीटिंग को लेकर बताया कि इसमें विपक्ष की 19 पार्टियों ने हिस्सा लिया। टीएमसी से लेकर शिवसेना (उद्धव गुट) तक बैठक में शामिल हुई। हालांकि समाजवादी पार्टी के मुखिया और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल इसमें शामिल नहीं हुए। अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल दोनों ने ही इस बैठक से कन्नी काट ली है क्योंकि यूपी और पंजाब दोनों जगह विधानसभा चुनाव होने हैं।
सीटें जरूरी, इसलिए बनाई दूरी ?
करीब साढ़े तीन महीने बाद हो रही INDIA ब्लॉक की इस बैठक में अखिलेश यादव का शामिल नहीं होना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है। मसलन दोनों ही पार्टियां यूपी में गठबंधन में चुनाव लड़ेगी लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों तरफ से बयानबाजी जोरों पर हैं। ऐसा भी कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव टिकट बंटवारे में पूरी तरह नियंत्रण चाहते हैं और उनकी इच्छा है कि ज्यादा से ज्यादा सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार उतारे जाएं।
वहीं दूसरी तरफ यूपी कांग्रेस के तमाम नेता 150 से ज्यादा सीटों पर ताल ठोक रहे हैं। अभी एक दिन पहले ही मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने साफ कर दिया था कि सपा और कांग्रेस का गठबंधन जल्द फाइनल होगा, जिसकी शीर्ष वार्ता सिर्फ अखिलेश यादव, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे करेंगे।
सपा सांसद ने की बयानबाजी न करने की ताकीद
उन्होंने कांग्रेस को अपनी जमीन देखकर सीटें मांगने की सलाह दी और इमरान मसूद को गठबंधन के खिलाफ बयानबाजी न करने की ताकीद की। अखिलेश यादव की व्यस्तताओं को गठबंधन में अनबन मानने से इनकार करते हुए ऐसी किसी भी खबर को खारिज कर दिया।
हालांकि कांग्रेस सांसद इमरान मसूद सीटों के बंटवारे को लेकर आए दिन समाजवादी पार्टी पर हमलावर रहते हैं। सीटों को लेकर दोनों पार्टियों में जारी तनातनी को भी अखिलेश यादव के इंडिया ब्लॉक की मीटिंग में शामिल नहीं होने का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। अखिलेश शायद यह संदेश भी देना चाहते हैं कि वो कांग्रेस के टॉप लीडरशिप से नाराज हैं।
अखिलेश पर कांग्रेस ने क्या कहा ?
इसे आप संयोग कहें या प्रयोग जब दिल्ली में तमाम विपक्षी दल बैठकर ज्ञानेश कुमार पर मंथन कर रहे हैं उसी दौरान अखिलेश यादव लखनऊ में किसानों के सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। दोनों पार्टियों की तरफ से दावा तो ये भी किया जा रह है कि इसको लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से अखिलेश यादव की बात भी हुई थी और उन्होंने राज्यसभा चुनाव के नामांकन में व्यस्तता और पहले से तय कार्यक्रमों की वजह से बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई थी।
कांग्रेस क्या चाहती है ?
दरअसल यूपी में कांग्रेस का जनाधार बेहद कम है लेकिन फिर भी पार्टी चाहती है कि कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ा जाए. यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम का दावा है कि पार्टी की तैयारी सभी 403 सीटों पर है। हालांकि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 2.3% वोट शेयर ही प्राप्त हुआ था जबकि सिर्फ दो सीटों पर ही जीत मिली थी।
कितनी सीटें देना चाहते हैं अखिलेश
वहीं अखिलेश यादव की अगुवाई में समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 85 से 90 सीटें देने के ही पक्ष में है। अखिलेश यादव की पार्टी का तर्क है कि सीटों की संख्या से ज्यादा जीतने की क्षमता (winnability) मायने रखती है और सीटों की संख्या और उम्मीदवारों का चयन इसी आधार पर होना चाहिए। यहीं आकर दोनों पार्टियों के बीच पेंच फंसा हुआ है।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल
























