लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर योगी सरकार की ओर से अपराध और संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 23,601 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराध से अर्जित की गई 15,233 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है। सरकार की ओर से अपराध पर लगाम लगाने के लिए पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ साइबर अपराध के खिलाफ भी बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। साइबर ठगी के मामलों में कार्रवाई करते हुए अब तक 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की रकम फ्रीज या होल्ड कराई गई है। इसका मकसद ठगी के बाद अपराधियों के खातों में पहुंची रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकना और पीड़ितों को राहत दिलाना है।
उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से लंबे समय से फरार चल रहे और अलग-अलग मामलों में इनाम घोषित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया गया। इसी कार्रवाई के तहत अब तक 23,601 इनामी अपराधियों को पकड़ा गया है। पुलिस का फोकस ऐसे अपराधियों पर भी रहा है, जो संगठित गिरोह बनाकर अपराध को अंजाम देते हैं या लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे थे। अपराधियों पर कार्रवाई के साथ उनके आर्थिक नेटवर्क को भी निशाना बनाया गया। गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराध से जुड़ी संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 15,233 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की अवैध चल और अचल संपत्तियों पर कार्रवाई हो चुकी है।
पुलिस की कार्रवाई सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रही। संगठित अपराध से जुड़े लोगों की आर्थिक ताकत को कमजोर करने के लिए उनकी अवैध संपत्तियों को भी कार्रवाई के दायरे में लाया गया। इसके तहत जमीन, मकान और दूसरी चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया गया। सरकार का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य अपराध के जरिए बनाई गई संपत्ति पर रोक लगाना और आपराधिक गिरोहों की आर्थिक व्यवस्था को तोड़ना है। इससे अपराधियों पर कानूनी कार्रवाई के साथ उनके आर्थिक संसाधनों पर भी दबाव बनाया जा रहा है।
बदलते समय के साथ साइबर अपराध भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऑनलाइन ठगी, बैंक खातों के जरिए पैसे ट्रांसफर करने और डिजिटल माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस ने अपनी निगरानी बढ़ाई है। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही जिलों के सामान्य पुलिस थानों में भी साइबर सेल और साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है। इससे साइबर अपराध की शिकायत मिलने पर स्थानीय स्तर पर भी कार्रवाई की जा सके।
साइबर ठगी के मामलों में सबसे अहम चुनौती ठगी की रकम को अपराधियों तक पहुंचने से रोकना होती है। पुलिस की कार्रवाई में अब तक 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई है। इस प्रक्रिया के जरिए संदिग्ध बैंक खातों में पहुंची रकम को आगे निकाले जाने या दूसरे खातों में ट्रांसफर किए जाने से रोकने की कोशिश की जाती है। साइबर अपराध के मामलों में पुलिस और बैंकिंग सिस्टम के बीच समन्वय भी इस कार्रवाई का अहम हिस्सा है। साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों को स्थानीय स्तर पर दर्ज कराने और शुरुआती मदद देने के लिए प्रदेश के सभी जनपदों के पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं। इसके जरिए लोगों को ऑनलाइन ठगी और दूसरे डिजिटल अपराधों की शिकायत दर्ज कराने में सुविधा मिल रही है। सरकार और पुलिस की ओर से लोगों को साइबर ठगी से बचने के लिए भी लगातार जागरूक किया जा रहा है। खासतौर पर बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड और दूसरी निजी जानकारियां किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करने की अपील की जाती है।
उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण की रणनीति में अब पारंपरिक अपराधों के साथ साइबर अपराध भी बड़ा हिस्सा बन गया है। एक तरफ पुलिस इनामी अपराधियों और संगठित गिरोहों के खिलाफ अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल फ्रॉड से जुड़े मामलों में रकम को रोकने और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। सरकार के अनुसार, इन कार्रवाइयों का मकसद प्रदेश में अपराधियों पर कानूनी शिकंजा कसने के साथ उनकी आर्थिक गतिविधियों पर भी रोक लगाना है। इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी, गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्ती और साइबर अपराध के मामलों में रकम फ्रीज कराने को इसी व्यापक अभियान का हिस्सा बताया गया है।
रिपोर्ट- मानवी
























