राघोपुर प्रखंड के रामपुर श्यामचंद गांव में मंगलवार की रात हुए नाव हादसे ने कई परिवारों की खुशियां उजाड़ दीं। गांव में आयोजित श्राद्ध भोज में शामिल होने के लिए लोग नाव से नदी पार कर रहे थे। तभी नाव अचानक पलट गई और कई लोग पानी में समा गए। देखते ही देखते भोज की तैयारियों का माहौल चीख-पुकार में बदल गया। हादसे की खबर मिलते ही ग्रामीण मौके पर दौड़े और अपने स्तर पर बचाव में जुट गए। उन्होंने कई लोगों को पानी से निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन कुछ मासूमों को बचाया नहीं जा सका। इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक पहलू राजकिशोर राय के परिवार का है। उनकी तीन बेटियां अंकिता (14), अंकी (10) और अमृता (7) हादसे का शिकार हो गईं। अंकिता आठवीं, अंकी चौथी और अमृता तीसरी कक्षा में पढ़ती थीं। तीनों बहनें घर की रौनक थीं। एक ही रात में तीनों के चले जाने से पूरा घर सन्नाटे और मातम में डूबा है।
डोमन राय की 22 वर्षीय बेटी पिंकी कुमारी की भी डूबने से मौत हो गई। नाव में उसके साथ छोटी बहन चांदनी कुमारी और तीन वर्षीय भांजा तेज प्रताप कुमार भी सवार थे। ग्रामीणों ने दोनों को बाहर निकाला और राघोपुर फतेहपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) रेफर किया गया। तेज प्रताप करीब चार महीने से अपने ननिहाल में रह रहा था। मुकेश राय का आठ वर्षीय बेटा नमन कुमार भी हादसे में जान गंवा बैठा। वह चौथी कक्षा का छात्र था और तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। उसके पिता कोलकाता के एक होटल में खाना बनाकर परिवार का पेट पालते हैं। बेटे की मौत की खबर ने उस परिवार को भीतर तक तोड़ दिया है। सत्येंद्र राय की 14 वर्षीय बेटी निशु कुमारी की भी मौत हो गई। वह आठवीं में पढ़ती थी और भाई-बहन में सबसे छोटी थी। हादसे में सत्येंद्र खुद भी घायल हुए, जिन्हें बचाकर अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही उन्होंने बेटी और पोती की कोचिंग फीस के लिए 3,000 रुपये जमा किए थे। इसके अलावा 15 वर्षीय अंकित ने भी अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
NMCH के शिशु रोग विभाग की इमरजेंसी में 11 वर्षीय अनुष्का कुमारी, सात वर्षीय कार्तिक कुमार और पांच वर्षीय पूटूस कुमार भर्ती हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार के अनुसार दो बच्चों की हालत गंभीर है। फेफड़ों में गंदा पानी जाने से उनमें निमोनिया जैसे लक्षण दिखे हैं और किडनी पर भी असर पड़ा है। दोनों को ऑक्सीजन पर रखा गया है और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है। वहीं 48 वर्षीय सत्येंद्र राय और 55 वर्षीय वीरेंद्र कुमार का इलाज के बाद घर लौट आए हैं। हादसे के बाद नाव की स्थिति, उस पर सवार लोगों की संख्या और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या नाव क्षमता से अधिक भरी थी? क्या सवारों के पास लाइफ जैकेट जैसे बचाव के साधन थे? इन सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच से ही मिल सकेंगे। ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों की जिम्मेदारी तय हो और नदी पार करने के लिए सुरक्षित व्यवस्था बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। रामपुर श्यामचंद में हर घर की कहानी अलग है, पर दर्द एक है। किसी ने तीन बेटियां खो दीं, किसी ने बड़ा बेटा, तो किसी की जवान बेटी हमेशा के लिए बिछड़ गई। अब जरूरत है कि पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद मिले और हादसे की तह तक जाकर सच सामने लाया जाए।
























