मुरादाबाद में लेखपाल पर खातों में हेरफेर कर नजूल भूमि पर अवैध कब्जा कराने का आरोप लगा है। इस आरोप के बाद लेखपाल पर विभागीय जांच शुरु की गई थी। लेखपाल के विरुद्ध चली जांच तहसीलदार को सौंपी गई थी। विभागीय जांच में दोषी पाये जाने के बाद लेखपाल अमर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामला सिविल लाइंस के ग्राम छावनी स्थित गाटा संख्या 430 की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्ज़े से जुड़ा है। जांच में खुलासा हुआ कि बिना किसी सक्षम प्रशासनिक आदेश के वंदना अग्रवाल को जमीन पर कब्जा दिलाया गया था। इस प्रकरण की शिकायत मंडलायुक्त के यहाँ की गई थी। शिकायत मिलने के बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व की जांच को जांच सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह सख्त कार्रवाई की गई है।

जिलाधिकारी के निर्देश में निलंबन आदेश के साथ ही आरोपी लेखपाल के खिलाफ विभागीय और आपराधिक (क्रिमिनल) कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। तहसीलदार सदर को इस पूरे प्रकरण में जांच अधिकारी नामित करते हुए 15 दिन में आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है। प्रशासन की इस बड़ी कार्रवाई से भ्रष्ट कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों के अनुसार इस पूरे प्रकरण में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। मुरादाबाद में करोड़ों रुपये कीमत की नजूल भूमि पर अवैध तरीके से खाते में हेरफेर की गई थी। इस पूरे प्रकरण में लेखपाल अमर सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे। मुरादाबाद मंडलायुक्त को शिकायत मिलने के बाद इस प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए। प्रथम दृष्टया लेखपाल अमर सिंह को दोषी पाया गया। अब लेखपाल अमर सिंह पर आपराधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए है। गौरतलब है कि मुरादाबाद स्थित नजूल भूमि की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। सरकारी भूमि पर भू माफियाओं द्वारा कॉलोनी बनाने की तैयारी की जा रही थी।
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इस खबर के सामने आने के बाद सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। लेखपाल के द्वारा खातों में हेरफेर का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में लेखपाल द्वारा भू भूमाफियाओं से मिलीभगत करने के मामले सामने आए हैं। इससे पहले हापुड़ में भी इसी प्रकार राजू नाम के लेखपाल पर भू माफियाओं के साथ मिलीभगत कर सेना की भूमि को बेच दिया गया था। इस प्रकरण में भी कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए गए थे।
























