वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब माफियाओं की भूमि पर आम लोगों के महल बनेंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान को प्रदेश की कानून-व्यवस्था और गरीबों के हक से जोड़कर देखा जा रहा है। एक दौर था जब कई इलाकों में दबंगों और माफियाओं का खौफ चलता था। आम आदमी अपनी ही जमीन और अपने ही घर को लेकर डरा रहता था। सरकार का कहना है कि अब हालात बदल चुके हैं। अवैध कब्जों से मुक्त कराई गई जमीनों का उपयोग अब जनता के हित में किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के शब्दों का सीधा मतलब यह है कि जिस ज़मीन पर कभी अपराध और अवैध कमाई की इमारतें खड़ी होती थीं, वहाँ अब गरीब, मज़दूर और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए पक्के मकान और सुविधाएँ बनेंगी। यहाँ “महल” शब्द भव्यता से ज़्यादा उस सम्मान का प्रतीक है, जो हर परिवार को सिर पर छत के रूप में चाहिए। बीते वर्षों में प्रदेश सरकार ने माफियाओं की अवैध संपत्तियों के विरुद्ध कई कार्रवाइयाँ की हैं। कहीं कब्ज़े की जमीन छुड़ाई गई, तो कहीं उस पर गरीबों के लिए आवास तैयार किए गए। सरकार इसे केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि समाज को दिया गया संदेश बताती रही है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
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काशी का अपना अलग महत्व है। यह शहर आस्था, संस्कृति और विकास, तीनों का संगम बन चुका है। ऐसे में यहाँ से दिया गया संदेश दूर तक जाता है। स्थानीय लोगों के बीच भी इस बयान की चर्चा रही। कई लोगों का मानना है कि यदि ऐसी ज़मीनें सचमुच जरूरतमंदों को मिलें, तो यह बड़ा बदलाव होगा। हालांकि विपक्ष और आलोचक अक्सर ऐसे बयानों को राजनीति से जोड़कर देखते हैं। फिर भी इतना तय है कि भूमि, आवास और सुरक्षा जैसे मुद्दे आम जनता के जीवन से सीधे जुड़े हैं, इसीलिए इन पर दिया गया हर बयान गंभीरता से सुना जाता है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री की यह बात ज़मीन पर कितनी तेज़ी से उतरती है। जनता को उस दिन का इंतज़ार है, जब ये बातें ईंट और सीमेंट में बदलकर सचमुच घर का रूप ले लेंगी।
























