इस बार दशहरे पर राजधानी दिल्ली की एक रामलीला में लोगों को कुछ अलग देखने को मिलेगा। पीतमपुरा में रामलीला का आयोजन करने वाली श्री केशव राम लीला समिति ने तय किया है कि रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फुट ऊंचा ‘कॉकरोच’ भी फूंका जाएगा। इस अनोखे फैसले के बाद से यह रामलीला चर्चा में आ गई है। समिति का कहना है कि कॉकरोच को गंदगी के प्रतीक के रूप में चुना गया है। उसके मुताबिक यह पहल ‘स्वच्छ भारत’ और ‘स्वच्छ दिल्ली’ अभियानों से जुड़ी है। आयोजकों की मंशा है कि रामलीला देखने आने वाले हजारों लोग बुराई के अंत के साथ-साथ साफ-सफाई का संदेश भी अपने साथ ले जाएं। दशहरे का पर्व वैसे भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, इसलिए समिति इसे उसी भावना का विस्तार बता रही है।
समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल ने इस पर सफाई भी दी। उन्होंने साफ कहा कि पुतला जलाने का निर्णय राजनीति से प्रेरित नहीं है। उनके अनुसार इसका मकसद सिर्फ इतना है कि स्वच्छता का संदेश और मजबूती से लोगों तक पहुंचे। गोयल ने यह भी बताया कि कॉकरोच को रावण की सेना के ‘असुरों’ में गिना जाएगा। यानी मंच पर वह भी बुराई की उसी टोली का हिस्सा होगा, जिसका अंत रामलीला के समापन पर होता है। इस फैसले को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज है कि यह ऐसे समय में सामने आया है, जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन सुर्खियों में हैं। यह समूह इससे पहले पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ आवाज उठा चुका है। जून और जुलाई के दौरान सीजेपी के कार्यकर्ता एक महीने से ज्यादा समय तक जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे रहे। इसके बाद 20 जुलाई को उन्होंने संसद तक मार्च निकाला, और उसी दिन धर्मेंद्र प्रधान को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
अब यही संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। उसका आरोप है कि चुनावी सूचियों के विशेष गहन संशोधन में अनियमितताएं हुई हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली में कई कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों को हिरासत में भी लिया गया है। एक तरफ समिति अपने फैसले को पूरी तरह स्वच्छता और धार्मिक परंपरा से जोड़कर देख रही है, तो दूसरी तरफ लोग इसे चल रही राजनीतिक हलचल से जोड़कर देख रहे हैं। गोयल के बयान से साफ है कि आयोजक इस विवाद में नहीं पड़ना चाहते। उनका जोर इसी बात पर है कि रामलीला का मंच समाज को सकारात्मक संदेश देने का जरिया है। अब सबकी नजरें दशहरे के दिन पर हैं, जब पीतमपुरा के मैदान में रावण के साथ यह विशालकाय कॉकरोच भी आग के हवाले किया जाएगा। यह नजारा देखने के लिए भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। फिलहाल समिति अपने रुख पर कायम है कि यह आयोजन किसी दल या आंदोलन के लिए नहीं, बल्कि स्वच्छ दिल्ली के सपने के लिए है।
























