नई दिल्ली: चुनाव आयोग (Election Commission) की विश्वसनीयता पर उठते सवालों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पक्षपात को लेकर जारी बवालों के बीच इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने चुनावी प्रक्रियाओं में सात बड़े सुधार का फैसला लिया है। चुनाव आयोग अब देश की राजनीतिक पार्टियों को रीडेबल वोटर्स रोल वाली पूरी सूची देने को तैयार है। इसमें ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जोड़े गए, हटाए गए, संशोधित किए गए नामों की सप्लीमेंट्री लिस्ट भी शामिल है।
ऐसे में सवाल हैं कि आखिर वो कौन से 7 बड़े सुधार हैं जिसके लिए इतने बवाल के बाद अब चुनाव आयोग तैयार है। दरअसल नेता विपक्ष राहुल गांधी का आरोप था कि चुनाव आयोग जानबूझकर फोटो फॉर्मेट वाली लिस्ट देता था जिसमें फर्जी वोटरों का पता लगाना बेहद मुश्किल था. इन्हीं आरोपों को लेकर अब 7 बड़े बदलाव किए गए हैं।
1. देश के मान्यता प्राप्त दलों को ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्ट की दोनों चरणों में हार्ड कॉपी के साथ-साथ पीडीएफ (डिजिटल) फाइल भी दी जाएगी जिसे कंप्यूटर पर आसानी से देखा जा सकेगा। डिजिटल कॉपी में वोटरों की तस्वीर नहीं होगी।
2. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जोड़ गए, हटाए गए, संशोधित किए गए नामों की सप्लीमेंट्री लिस्ट भी राजनीतिक पार्टियों को दी जाएंगी ताकि उन्हें पता चल सके कि किस-किस वोटर का नाम किस वजह से हटाया गया है।
3.फर्जी फॉर्म भरकर किसी खास वर्ग के लोगों का नाम वोटर लिस्ट से कटवाए जाने के आरोपों के बाद अब चुनाव आयोग ने फॉर्म 7 जमा करने की अधिकतम सीमा भी तय कर दी गई है।
4. अब कोई भी वोटर दावे और आपत्तियों के लिए कुल 10 बार ही फॉर्म 7 दे सकता है। किसी भी गड़बड़ी पर बीएलओ घर जाकर घुद इसका सत्यापन करेंगे।
5. किसी शख्स या वोटर को अब वोटर आई कार्ड में सुधार करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। इसके लिए चुनाव आयोग अपनी वेबसाइट पर सॉफ्यवेयर में सुधार कर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स को यह विकल्प देगा कि वो फ्लैग्ड वोटरों को बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के वैध घोषित कर सके।
6. चुनाव आयोग पर वोटरों के डिजिटल मैनेजमेंट और बैकएंड डेटा से छेड़छाड़ के आरोप भी राजनीतिक पार्टियों ने लगाए थे जिसके बाद अब इसके लिए एक स्वतंत्र आईआईटी एक्सपर्ट कमेटी आयोग के डिजिटल पोर्टल मैनेजमेंट और सुरक्षा तकनीकों की जांच करेगी।
7. एक जनवरी 2027 तक देश में जिनकी भी उम्र 18 वर्ष पूरी होगी उनके नाम को वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए स्पेशल रजिस्ट्रेशन प्रोग्राम का आयोजन होगा जिससे अगले साल जितने भी राज्यों में विधानसभा चुनाव है उसमें कोई भी योग्य वोटर ना छूटे और नया वोटर लिस्ट समय से जारी किया जा सके।
अब देखने वाली बात ये है कि क्या तमाम विपक्षी दल इन बदलावों से संतुष्ट होते हैं या फिर किसी और बदलाव की भी मांग करते हैं।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल
























