बुधवार, 21 अक्टूबर को Greece की राजधानी एथेंस की सड़कें नारों और तख्तियों से भर गईं। सरकारी शिक्षा की बिगड़ती हालत, कम वेतन और संसाधनों की कमी से नाराज़ हजारों छात्र और शिक्षक एक साथ सड़कों पर उतर आए। उनकी मांगें साफ थीं। शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाया जाए, स्कूलों में बेहतर सुविधाएं मिलें और कक्षाओं में बच्चों की संख्या कम की जाए। पुलिस के मुताबिक एथेंस के केंद्रीय और बाहरी इलाकों में निकली यह रैली पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। करीब 10,000 लोग इसमें शामिल हुए, जिनमें स्कूल और विश्वविद्यालयों के छात्र बड़ी संख्या में थे। देश के दूसरे शहरों में भी लोगों ने रैलियां निकालीं और अपनी आवाज़ उठाई। मार्च से एक दिन पहले छात्रों ने एथेंस के सिंटाग्मा स्क्वायर में टेंट लगा लिए थे और पूरी रात वहीं डटे रहे। बुधवार को संसद के बाहर जुटी भीड़ एक सुर में नारे लगा रही थी, “ग्रीस से लेकर फ्रांस तक, हमें सार्वजनिक और मुफ्त शिक्षा चाहिए।”
इस आंदोलन की जड़ें सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं हैं। ग्रीस को गहरे कर्ज संकट से बाहर निकले कई साल हो चुके हैं, लेकिन आम परिवारों को इसका फायदा महसूस नहीं हो रहा। वेतन लंबे समय से ठहरे हुए हैं, घरों का किराया ऊंचा है और ऊर्जा की बढ़ती लागत ने घर का बजट और बिगाड़ दिया है। ऐसे में शिक्षा से जुड़ा गुस्सा रोजमर्रा की आर्थिक मुश्किलों के साथ मिलकर और तेज हो गया है। वेतन और कर्मचारियों की कमी के विरोध में कुछ प्राइमरी स्कूलों के शिक्षक और डॉक्टर काम पर नहीं पहुंचे। इसका असर सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के कामकाज पर पड़ा। साफ है कि नाराज़गी सिर्फ कक्षाओं तक नहीं, बल्कि पूरी सार्वजनिक सेवा व्यवस्था तक फैली हुई है।
ग्रीस में 2027 के मध्य में चुनाव होने हैं। ऐसे में इन प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोटाकिस की सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। शिक्षा, महंगाई और रहन-सहन की लागत जैसे मुद्दे सीधे आम मतदाता की जिंदगी से जुड़े हैं, इसलिए सरकार के लिए इन्हें नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं होगा। ग्रीस की यह मांग यूरोप में चल रहे दूसरे प्रदर्शनों से मिलती-जुलती है। फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों में भी बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं। प्रदर्शनकारियों के नारे में फ्रांस का जिक्र इसी साझा नाराज़गी की ओर इशारा करता है। प्रदर्शनों से पहले शिक्षा मंत्री सोफिया जाचाराकी ने कहा था कि वे छात्रों की मांगों को सुन रही हैं। उन्होंने यह भी माना कि आवास की बढ़ती लागत ग्रीस के परिवारों पर भारी दबाव डाल रही है। अब देखना यह है कि यह आश्वासन ठोस फैसलों में बदलता है या नहीं, क्योंकि छात्र और शिक्षक साफ कर चुके हैं कि उन्हें सिर्फ बातें नहीं, बदलाव चाहिए।
























