इसके बाद दोनों लोग किसी तरह ग्वालियर पहुंचे, जहां से बृजेन्द्र अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। जब दूसरा रिश्तेदार अकेला इटावा वापस लौटा और परिजनों को बृजेन्द्र के गुमशुदा होने की जानकारी दी, तो परिवार में हड़कंप मच गया और उन्होंने तलाश शुरू कर दी। इसी बीच 21 अक्टूबर को बृजेन्द्र का शव ग्वालियर के एक नाले से बरामद हुआ। ग्वालियर पुलिस ने शव की शिनाख्त करवाकर 22 अक्टूबर को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। जब शव 22 अक्टूबर की रात इटावा पहुंचा, तो परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने साथ गए रिश्तेदार पर बृजेन्द्र की हत्या का सीधा आरोप लगाया। प्रदर्शन और हंगामे की सूचना मिलते ही सीओ सिटी अवनीश कुमार सिंह और प्रभारी निरीक्षक यशवंत सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों को रात 11 बजे तक काफी देर समझा-बुझाकर शांत कराया और इस मामले में निष्पक्ष जांच तथा सख्त कानूनी कार्रवाई का पूरा आश्वासन दिया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए और शव को अपने साथ ले गए। फिलहाल पुलिस ग्वालियर पुलिस के संपर्क में है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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