नई दिल्ली। कैमरे के पीछे रहने वाले रेहान वाड्रा इन दिनों अचानक सुर्खियों में आ चुके हैं। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे की फोटो प्रदर्शनी से तस्वीरें हटाए जाने का मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि अब उसे सियासी चश्मे से देखा जाने लगा है। चर्चा यह भी है कि क्या नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी सार्वजनिक जीवन में कदम रख रही है। दिल्ली के बीकानेर हाउस में रेहान की पहली एकल प्रदर्शनी “नो आइडिया इज फाइनल” बुधवार शाम शुरू हुई। रेहान के मुताबिक उन्हें उद्घाटन से कुछ ही देर पहले बताया गया कि उनकी 105 में से 70 तस्वीरें हटानी होंगी। उनका कहना है कि इनमें ज्यादातर दिल्ली में हुए युवाओं के प्रदर्शनों की तस्वीरें थीं। रेहान ने यह भी बताया कि उनसे तिरंगे की दो तस्वीरें हटाने को भी कहा गया। उन्होंने साफ किया कि तिरंगे की तस्वीरें हटाने से उन्होंने मना कर दिया। उनका दावा है कि बात न मानने पर प्रदर्शनी रद्द करने की चेतावनी दी गई।
बीकानेर हाउस सोसाइटी प्रबंधन का कहना है कि कुछ तस्वीरें संस्था की नीति के अनुरूप नहीं है, इसलिए उन्हें हटाने का आग्रह किया गया। बाकी तस्वीरों के साथ प्रदर्शनी जारी रहेगी। विवाद बढ़ा तो कांग्रेस और उसके सहयोगी दल रेहान के पक्ष में उतर आए। प्रियंका गांधी ने बेटे का साथ देते हुए कहा कि उन्हें उस पर गर्व है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में बैठे लोगों का किसी की अभिव्यक्ति से डरना ठीक नहीं है। पिता रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि प्रदर्शनी का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और रेहान एक फोटो कलाकार हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी भाजपा को घेरा और कलाकारों की आवाज दबाने को लोकतंत्र पर हमला बताया। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने रेहान को अपने राज्य में प्रदर्शनी लगाने का न्योता दिया है। भाजपा इस पूरे प्रकरण को अलग नजरिए से देख रही है। पार्टी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह रेहान को राजनीति में लाने की कोशिश कर रही है। भाजपा ने इसे रेहान के लिए राजनीतिक लॉन्चिंग का प्रयास बताया है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने प्रियंका पर गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि स्थल की नीति में राजनीतिक सामग्री की मनाही है। उन्होंने तंज कसा कि बेटे को लॉन्च करने के और भी तरीके हो सकते हैं।
वाड्रा परिवार का कहना है कि रेहान बचपन से फोटोग्राफी करते आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे दस साल की उम्र से कैमरे के साथ हैं और ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफी में दिलचस्पी रखते हैं। उन पर अपने नाना, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की फोटोग्राफी का भी असर माना जाता है। फिलहाल उनकी ओर से राजनीति में आने की कोई घोषणा सामने नहीं आई है। रेहान का कहना है कि वे हटाई गई तस्वीरों को दिखाने के लिए दिल्ली में कोई दूसरी जगह तलाश रहे हैं। प्रदर्शनी दिसंबर में बेंगलुरु भी जाने वाली है। इस पूरे घटनाक्रम में दो बातें साफ दिखती हैं। एक तरफ कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर चोट बता रही है। दूसरी तरफ भाजपा और बीकानेर हाउस प्रबंधन इसे नियमों और नीति का मामला बता रहे हैं। सच क्या है, यह आगे आने वाले तथ्यों और सफाइयों से तय होगा। इतना जरूर है कि एक फोटो प्रदर्शनी ने रेहान वाड्रा को वह पहचान दे दी है, जो शायद कई साल की मेहनत से भी नहीं मिलती।
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