नैनीताल: सप्ताहांत की छुट्टियों के चलते कैंची धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन और आशीर्वाद के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त और पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। भीड़ बढ़ने से मंदिर परिसर और उसके आसपास के मार्गों पर दिनभर चहल-पहल बनी रही। वाहनों का दबाव बढ़ता देख नैनीताल पुलिस ने यातायात व्यवस्था को पटरी पर रखने के लिए मोर्चा संभाल लिया। नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित कैंची धाम की गिनती उत्तराखंड के प्रमुख आस्था केंद्रों में होती है। पहाड़ी इलाका होने के कारण यहां की सड़कें सीमित चौड़ाई वाली हैं। ऐसे में छुट्टी के दिनों में जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु निजी वाहनों से पहुंचते हैं, तो जाम की आशंका बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने पहले से ही विशेष व्यवस्था की है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजुनाथ टीसी के निर्देश पर यातायात योजना लागू की गई है। इसके तहत पुलिसकर्मियों को प्रमुख स्थानों पर तैनात किया गया है, जो वाहनों का संचालन सुचारु बनाए रखने में जुटे हैं। यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पुलिस की टीमें लगातार सक्रिय हैं। व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए पुलिस उपाधीक्षक नैनीताल-भवाली अंजना नेगी स्वयं जीरो प्वाइंट पहुंचीं। उन्होंने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर यातायात को संभाला और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित कराया। अधिकारियों की मौजूदगी से मौके पर तैनात कर्मियों को भी निर्देश देने और हालात के अनुसार निर्णय लेने में आसानी हुई। भीड़ को नियंत्रित करने और सड़क पर वाहनों का बोझ घटाने के लिए शटल सेवा का संचालन भी जारी है। सेनेटोरियम, भवाली तिराहे और भीमताल स्थित विकास भवन से श्रद्धालुओं को शटल के जरिये धाम तक पहुंचाया जा रहा है। इस व्यवस्था से एक ओर जहां लोगों को सुविधा मिल रही है, वहीं दूसरी ओर मुख्य मार्ग पर निजी वाहनों की संख्या भी कम हो रही है।
पुलिस ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे अपने वाहन केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़े करें। साथ ही शटल सेवा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और यातायात नियमों का पालन करें। सड़क किनारे या संकरे मोड़ों पर वाहन खड़े करने से जाम की स्थिति बन सकती है, जिससे न सिर्फ दूसरे यात्रियों को परेशानी होती है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही में भी बाधा आ सकती है। पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करते समय धैर्य और सावधानी बेहद जरूरी है। तेज रफ्तार, गलत ओवरटेकिंग और अनुशासनहीनता से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए यात्रियों को चाहिए कि वे पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें और अपनी बारी का इंतजार करते हुए आगे बढ़ें। यदि थोड़ी-सी समझदारी दिखाई जाए, तो दर्शन की यात्रा सभी के लिए सुगम और सुरक्षित बन सकती है।























