शामली की सियासी फिजा में उस वक़्त गर्मी आ गई, जब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने जनसभा को संबोधित किया। अपने चिर-परिचित तीखे अंदाज़ में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी जमकर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का मुसलमान पीढ़ियों से समाजवादी पार्टी को वोट देता आया है, लेकिन बदले में उसे सम्मान, हिस्सेदारी और तरक्की के नाम पर सिर्फ वादे मिले। उनका आरोप था कि सपा मुसलमानों के वोट तो चाहती है, मगर उनके असली मुद्दों पर चुप्पी साध लेती है। उन्होंने यह भी कहा कि अब वक्त आ गया है, जब समाज को दूसरों के भरोसे रहने के बजाय अपनी सियासी आवाज खुद बुलंद करनी होगी।
भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग धर्म और पहचान की राजनीति के सहारे असल सवालों से ध्यान भटकाते हैं। महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और गरीबों की हालत पर बात करने से सरकार बचती है। उन्होंने चुनावी मुकाबले को “गरीब बनाम अमीर” की लड़ाई बताया। सबसे दिलचस्प रहा योगी और अखिलेश के रिश्ते पर उनका तंज। ओवैसी ने दोनों नेताओं की आपसी बयानबाजी को “नूरा कुश्ती” यानी दिखावटी मुकाबला करार दिया। उनका कहना था कि मंच पर दोनों एक-दूसरे के खिलाफ दिखते हैं, लेकिन असल में उनके बीच “सेटिंग” है। हालांकि इस आरोप के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने चुनौती भी दी कि अगर दोनों इतने लोकप्रिय हैं, तो योगी संभल से और अखिलेश गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं।
ओवैसी ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं से घर-घर जाने की अपील की और AIMIM उम्मीदवारों के लिए समर्थन मांगा। दूसरी ओर, विपक्षी दल पहले से ही यह आरोप लगाते रहे हैं कि AIMIM भाजपा-विरोधी वोटों को बांटकर अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को फायदा पहुंचाती है। ओवैसी इस आरोप को लगातार खारिज करते आए हैं। जनसभा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और नारों के बीच ओवैसी के भाषण पर खूब तालियां बजीं। अब देखना यह होगा कि इन तीखे बयानों पर सपा और भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है। इतना तय है कि चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।





















