गोरखपुर: यूपी के गोरखपुर (New Gorakhpur) में नया शहर बसाने की तैयारी के बीच अब जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर सियासी संग्राम तेज होता दिखाई दे रहा है। सवाल है कि क्या शहर के विकास की कीमत किसानों को अपनी पुश्तैनी जमीन देकर चुकानी पड़ेगी? क्या किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार मिलेगा या साल 2016 के सर्किल रेट पर ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी?
इन सवालों को लेकर समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव कुंवर प्रताप सिंह ने प्रदेश सरकार और गोरखपुर विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कुंवर प्रताप सिंह ने दावा किया कि नया गोरखपुर बसाने के लिए शहर के पूर्वी हिस्से के 13 और उत्तरी हिस्से के 12 गांवों की करीब 6 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित करने की योजना है। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2016 के सर्किल रेट पर जमीन अधिग्रहण करना किसानों के साथ अन्याय है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से 10 हजार से अधिक किसान भूमिहीन होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।
मुआवजे की दरों पर भी उठाए सवाल
सपा नेता ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया, धारा 4 के प्रकाशन और मुआवजे की दरों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्य सचिव ने मार्च 2025 में बाजार भाव के अनुरूप सर्किल रेट जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों की समस्या को लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को मुख्य सचिव को पत्र लिखकर नया गोरखपुर बसाने का प्रस्ताव निरस्त करने की मांग की है।
कुंवर प्रताप सिंह ने सरकार को 2 नवंबर 2026 तक का अल्टीमेटम देते हुए नया गोरखपुर परियोजना का प्रस्ताव निरस्त करने, गीडा समेत अन्य सरकारी योजनाओं में साल 2016 के सर्किल रेट पर जमीन अधिग्रहण रोकने और गोरखपुर में नया सर्किल रेट लागू करने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर उन्होंने भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों के हितों की रक्षा करते हुए शहर के नियोजित विकास का रास्ता कैसे निकलेगा? क्या सरकार किसानों की आपत्तियों और मुआवजे की मांग पर कोई ठोस निर्णय लेगी, या यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज होगा?
योगी सरकार को दिया 2 नवंबर तक का अल्टीमेटम
गोरखपुर में प्रस्तावित नया गोरखपुर शहर अब जमीन अधिग्रहण और किसानों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर चर्चा के केंद्र में है। समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव कुंवर प्रताप सिंह ने प्रेस वार्ता कर इस परियोजना पर सवाल उठाए और किसानों के हित में सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
कुंवर प्रताप सिंह के अनुसार, शहर के पूर्वी हिस्से के 13 गांवों और उत्तरी हिस्से के 12 गांवों को मिलाकर कुल 25 गांवों की लगभग 6 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित है। उनका आरोप है कि जमीन का मूल्य साल 2016 के सर्किल रेट के आधार पर निर्धारित करना किसानों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने बाजार मूल्य के अनुरूप मुआवजा देने और साल 2026 का नया सर्किल रेट लागू करने की मांग की है।
रिपोर्ट: मुकेश कुमार


























