Karwa Chauth 2026: आज, 29 अक्टूबर को देशभर में करवा चौथ का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन पति के प्रति प्रेम, समर्पण और अखंड सौभाग्य की कामना का प्रतीक है। सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाकर महिलाएं निर्जला व्रत शुरू करती हैं। शाम को करवा माता की पूजा होती है और रात में चांद को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।

हर साल की तरह इस बार भी घर-घर में तैयारियां जोरों पर हैं। बाजारों में सजावट है, हाथों पर मेहंदी रची जा रही है और पूजा की थालियां सज रही हैं। लेकिन इस बार कई महिलाओं के मन में एक सवाल भी है कि क्या करवा चौथ पर भद्रा का साया है और क्या इसका असर पूजा पर पड़ेगा।
आखिर क्या है भद्रा?
हिंदू मान्यताओं में भद्रा को ऐसा समय माना जाता है जब कोई नया या मांगलिक कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। इसीलिए विवाह, गृह प्रवेश, पूजा-अनुष्ठान जैसे कामों से पहले लोग पंचांग देखकर भद्रा का समय जरूर जांच लेते हैं। यही वजह है कि करवा चौथ जैसे बड़े व्रत से पहले भी इसकी चर्चा होने लगती है। ज्योतिषियों और पंचांग की जानकारी रखने वालों के अनुसार, भद्रा को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है।

कई पंचांगों में बताया गया है कि भद्रा का प्रभाव 28 अक्टूबर की रात तक ही सीमित है, जबकि व्रत और पूजा 29 अक्टूबर को होनी है। इसलिए शाम की पूजा और चंद्र दर्शन में किसी तरह की बाधा नहीं मानी जा रही। फिर भी अलग-अलग पंचांगों में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अगर मन में संशय हो तो अपने परिवार के पंडित या स्थानीय ज्योतिषी से एक बार पूछ लेना अच्छा रहेगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को तड़के करीब 1:06 बजे शुरू हुई और रात लगभग 10:09 बजे तक रहेगी। करवा चौथ की पूजा के लिए प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के आसपास का समय, सबसे उत्तम माना जाता है। इस बार दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त शाम लगभग 5:38 बजे से 6:56 बजे तक रहेगा। यानी पूजा के लिए करीब सवा घंटे का समय मिलेगा। इसी अवधि में भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और करवा माता का पूजन कर कथा सुनना शुभ रहेगा। व्रत का समापन चंद्रोदय के बाद ही होता है, इसलिए सबकी निगाहें इसी समय पर टिकी रहती हैं।

दिल्ली-एनसीआर में चांद रात करीब 8:12 से 8:18 बजे के बीच दिखने की संभावना है। ध्यान रखें कि चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है। पूर्वी हिस्सों में चांद पहले दिखता है, जबकि पश्चिमी इलाकों में कुछ देर बाद। उदाहरण के लिए कोलकाता में यह करीब 7:42 बजे और मुंबई में लगभग 8:56 बजे बताया गया है। इसलिए अपने शहर का सही समय देखकर ही अर्घ्य की तैयारी करें। आसमान में बादल हों तो थोड़ा धैर्य रखें और चांद दिखने के बाद ही आगे बढ़ें।
पूजा की सरल विधि
शाम को पूजा से पहले स्नान कर साफ और सुंदर वस्त्र पहनें, फिर सोलह श्रृंगार करें। चौकी पर करवा माता, शिव-परिवार और गणेश जी की प्रतिमा या चित्र रखें। जल से भरा करवा, दीपक, रोली, चावल, मिठाई और फल थाली में सजाएं। परिवार की महिलाएं साथ बैठकर कथा सुनें और अंत में करवा बदलकर एक-दूसरे को सुहाग की सामग्री भेंट करें। रात में चांद निकलने पर छलनी से उसे देखें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा निहारें। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें और पति के हाथ से जल पीकर तथा कुछ खाकर व्रत खोलें। बड़ों का आशीर्वाद लेना न भूलें।
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व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
दिनभर शांत और सकारात्मक रहें तथा किसी से विवाद न करें। जो महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी कारणों से कठिनाई महसूस करती हों, वे अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। व्रत खोलते समय पहले हल्का भोजन या पानी लें, ताकि शरीर को आराम मिले। करवा चौथ का असली भाव श्रद्धा और आपसी विश्वास में बसता है। इसलिए भद्रा जैसी बातों से मन अशांत न करें। सही समय पर पूरे विश्वास के साथ पूजा करें, यही इस पर्व की सबसे बड़ी भावना है।


























