अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे से पहले अमेरिका ने चीन से जुड़ी तीन सैटेलाइट इमेजिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरान को ऐसी जानकारी उपलब्ध कराई, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी और सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों की पहचान के लिए किया जा सकता था।
तीन कंपनियों पर लगा बैन
अमेरिका ने जिन कंपनियों पर कार्रवाई की है, उनमें मीनट्रोपी टेक्नोलॉजी, मिजार विजन, द अर्थ आई और चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के नाम शामिल हैं। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि इन कंपनियों की गतिविधियां ईरान को सैन्य मदद पहुंचाने से जुड़ी थीं।
सैटेलाइट इमेजरी को लेकर आरोप
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन कंपनियों ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान ईरान को सैटेलाइट डेटा और टारगेटिंग से जुड़ी जानकारी दी। आरोप है कि यह जानकारी अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों और गतिविधियों से संबंधित थी।
ओपन-सोर्स तस्वीरों का मामला
रिपोर्ट के अनुसार, मीनट्रोपी टेक्नोलॉजी ने अमेरिकी और सहयोगी सैन्य गतिविधियों से जुड़ी ओपन-सोर्स सैटेलाइट तस्वीरें जारी की थीं। वहीं द अर्थ आई पर आरोप है कि उसने ईरान के अनुरोध पर डेटा जुटाकर तेहरान को उपलब्ध कराया।
ईरान के हथियार नेटवर्क पर भी कार्रवाई
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान, चीन, बेलारूस और यूएई से जुड़े 10 लोगों और संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इन पर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और शाहेद ड्रोन प्रोग्राम के लिए हथियारों और जरूरी सामग्री की खरीद में मदद करने का आरोप है।
ट्रंप का बीजिंग दौरा अहम
चीनी विदेश मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर डोनाल्ड ट्रंप चीन का दौरा करेंगे। यह यात्रा 13 मई से 15 मई 2026 तक होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब नौ साल बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति चीन की यात्रा कर रहा है।
किन मुद्दों पर होगी बातचीत?
चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ट्रंप और शी जिनपिंग चीन-अमेरिका संबंधों के साथ वैश्विक शांति और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे। ताइवान समेत कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है, इसलिए इस दौरे पर दुनिया की नजर रहेगी।


