फाल्टा विधानसभा सीट पर भारतीय चुनाव आयोग की सहमति और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आम सहमति बनी। इस पुनर्मतदान में करीब 87 प्रतिशत लाॅक ने अपना वोट डाला। गणना के बाद भारतीय जनता पार्टी के देबांगशु पांडा को विजेता घोषित किया गया। नतीजों में दूसरे स्थान पर वाम दल का उम्मीदवार रहा, जबकि तीसरे स्थान पर कांग्रेस और चौथे स्थान पर तृणमूल कांग्रेस का दावेदार रहा। फाल्टा विधानसभा सीट पर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत देखने को मिल रहे हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद यह परिणाम तृणमूल कांग्रेस के लिए एक परिवर्तनीय संदेश माना जा रहा है बेंचमार्कों का कहना है कि बेंचमार्क स्तर पर वैश्विक स्तर की पकड़ में गिरावट दिखाई दे रही है, और इस अध्ययन के पीछे के आधार पर राजनीतिक स्तर केवल एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आगे व्यापक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस की ओर से फाल्टा जेजेस के लिए एक मजबूत शेयरधारिता आधार मैन्युफैक्चरिंग जारी है, जहां अल्पसंख्यक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ हिंदू कैथोलिक, विशेष रूप से महिलाओं और सरकारी मंजूरी के गठबंधन का बड़ा हिस्सा पार्टी के समर्थन में बने हुए थे। लेकिन अविश्वास से यह साफ संकेत मिल रहा है कि यह पारंपरिक वोट स्कोर अब पहले जैसा मजबूत नहीं हो रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि फलता में वोट पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला है और जो पहले बैलेंस के पक्ष में था, वह इस बार काफी हद तक उलटा दिखाई दिया है।
पुनर्मतदान में भाजपा की अभूतपूर्व जीत
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा पिछले चुनाव को रद्द करने के बाद चुनाव आयोग ने इस बार के नतीजों में पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी का पक्ष रखा है। तीसरे में भाजपा उम्मीदवार देबांगशु पांडा ने 1,49,666 वोट हासिल किए और 71 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर के साथ अंतिम जीत दर्ज की। मतदान के आंकड़ों में आए इस बड़े बदलाव ने राजनीतिक सिद्धांतों का ध्यान खींचा है। CPI(M) के उम्मीदवार शंभू नाथ कुर्मी ने इस चुनाव में 40,645 वोट हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो करीब 20 प्रतिशत मतों के बराबर है। वहीं Indian National Congress के प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला तीसरे स्थान पर रहे। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान मात्र 7,783 वोट ही जुटा सके और चौथे स्थान पर रहते हुए उनकी जमानत जब्त हो गई। यह नतीजा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि महज दो साल पहले इसी फाल्टा क्षेत्र ने टीएमसी को भारी समर्थन दिया था। उस समय यह इलाका Abhishek Banerjee के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा था, जहां पार्टी को लगभग 89 प्रतिशत वोट मिले थे और उन्हें करीब 1.68 लाख वोटों की बड़ी बढ़त हासिल हुई थी।
फाल्टा में वोट शेयर में बड़ा उलटफेर, राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदले


