कभी-कभार सिर दर्द होना आम बात है। लेकिन जब दर्द धड़कता हुआ लगे, रोशनी और आवाज बर्दाश्त न हो और घंटों तक पीछा न छोड़े, तो यह माइग्रेन हो सकता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है, खासकर कामकाजी लोगों और महिलाओं में। राहत की बात यह है कि कुछ सावधानियों और घरेलू उपायों से इसकी तकलीफ काफी हद तक कम की जा सकती है। माइग्रेन का सटीक कारण अब भी पूरी तरह साफ नहीं है। माना जाता है कि मस्तिष्क की नसों और रसायनों में होने वाले बदलाव इसकी वजह बनते हैं। कई बातें इसे भड़का सकती हैं। तनाव और चिंता नींद की कमी या अनियमित नींद समय पर खाना न खाना या लंबे समय तक भूखे रहना जरूरत से ज़्यादा चाय-कॉफी तेज धूप, चमकती रोशनी या तेज गंध महिलाओं में हार्मोन संबंधी बदलाव मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर लंबा समय मौसम में बदलाव कुछ लोगों को चॉकलेट, चीज या पैकेट बंद खाने से भी परेशानी होती है।
हर व्यक्ति में माइग्रेन का कारण अलग हो सकता है, इसलिए अपने ट्रिगर पहचानना बहुत जरूरी है। माइग्रेन की पहचान कैसे करें? सामान्य सिर दर्द और माइग्रेन में फर्क करना जरूरी है। माइग्रेन में अक्सर दिखने वाले लक्षण जैसे सिर के एक तरफ तेज, धड़कता हुआ दर्द, जी मचलाना या उल्टी आना रोशनी, आवाज और गंध से परेशानी चक्कर या कमजोरी महसूस होना कुछ लोगों में दर्द से पहले आंखों के सामने धुंधलापन या चमकती रेखाएं दिखना दर्द का कुछ घंटों से लेकर एक-दो दिन तक बना रहना। दर्द शुरू होते ही कुछ आसान उपाय आजमाए जा सकते हैं:अँधेरे और शांत कमरे में आराम करें। रोशनी और शोर से दूरी दर्द को बढ़ने से रोकती है। ठंडी सिकाई करें। माथे या गर्दन के पीछे ठंडा कपड़ा रखने से आराम मिल सकता है। पानी पीते रहें। शरीर में पानी की कमी भी दर्द बढ़ा सकती है।अदरक की चाय लें। यह मितली में राहत दे सकती है। हल्की मालिश करें। माथे, कनपटी और गर्दन पर हल्के हाथों से मालिश करें। गहरी सांस लें। कुछ मिनट धीमी और गहरी सांस लेने से तनाव घटता है। नियमित दिनचर्या अपनाएँ। रोज एक तय समय पर सोएं और जागें।
खाली पेट न रहें और भोजन न छोड़ें। दर्द में मोबाइल, टीवी या लैपटॉप न देखें। तेज आवाज, तेज खुशबू और भीड़भाड़ से बचें। बार-बार खुद से दर्द निवारक दवा न लें। इसका ज्यादा इस्तेमाल उलटा असर कर सकता है। चाय-कॉफी की मात्रा न बढ़ाएं। तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें। अगर दर्द अचानक बहुत तेज हो, बुखार, गर्दन में अकड़न, बोलने में दिक्कत, हाथ-पैर में कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण हों, तो देर न करें और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। माइग्रेन बार-बार हो रहा हो, तब भी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। माइग्रेन को हल्के में न लें, लेकिन इससे घबराएं भी नहीं। संतुलित खानपान, भरपूर नींद, तनाव पर नियंत्रण और अपने ट्रिगर की पहचान से इसे काफी हद तक संभाला जा सकता है। घरेलू उपाय राहत देते हैं, पर इलाज का विकल्प नहीं हैं। इसलिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।
(नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी इलाज या परहेज से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें)























