DehradunNews: हरिद्वार नगर निगम ने सराय गांव में कूड़ा निस्तारण केंद्र के विस्तार के लिए करीब 33 बीघा जमीन लगभग 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी। इस भूमि खरीद में भारी अनियमितताओं और गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है। प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर की संस्तुति की गई है। तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई यानी दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) लगाने का निर्णय लिया गया है। इनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को भेजा जा रहा है। साथ ही उस समय कार्यरत एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। बता दें कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले के सामने आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई।

भ्रष्टाचार पर सख्त रुख किसी भी स्तर पर समझौता नहीं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी। धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई से जुड़ा विवाद गरमाया

हरिद्वार नगर निगम ने गांव सराय में स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र के विस्तार के लिए लगभग 33 बीघा भूमि 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी। आरोप है कि इस खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गईं। मुख्य आरोप यह है कि भूमि का लैंड यूज कृषि से बदलकर व्यावसायिक किया गया, जिससे इसका सर्किल रेट 6000 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़कर 25000 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गया। इस हेरफेर से करोड़ों का घोटाला हुआ है। 

10 लोगों पर मुकदमा दर्ज होगा: बड़ा प्रशासनिक एक्शन जारी

विजिलेंस की विस्तृत जांच में सामने आया है कि भूमि खरीद-फरोख्त में कथित आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के जरिए नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। शुरुआती जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की सिफारिश के बाद इस मामले में शामिल अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के खिलाफ केस दर्ज करने की मंजूरी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दे दी है। दोषियों पर भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्राण, संपत्ति लिपिक वेदपाल और मानचित्रकार दिनेश कांडपाल समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों में श्रीमती सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, श्री अभिषेक यादव तथा सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी अभियोग दर्ज किया जाएगा।

 

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