दिल्ली-काशी: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी और देश की राजधानी दिल्ली के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए शनिवार का दिन खास रहा। दोनों शहरों को जोड़ने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का शुभारंभ हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि नई सेवा से यात्रियों का समय बचेगा और उनका यात्रा अनुभव भी पहले से बेहतर होगा।

प्रधानमंत्री ने क्या कहा
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि दिल्ली और काशी के बीच रेल से सफर करने वालों के लिए यह दिन यादगार है। उनके मुताबिक आधुनिक सुविधाओं और उन्नत सुरक्षा प्रणाली से लैस यह देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन है। यानी रात के सफर के लिए तैयार की गई इस श्रेणी में यह दूसरी ट्रेन जुड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सेवा आस्था को अवसर से और परंपरा को आधुनिकता से जोड़ेगी।
चाहे कोई बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी आ रहा हो या संगम में डुबकी लगाने प्रयागराज जा रहा हो, यह ट्रेन दोनों तरह के यात्रियों के काम आएगी। प्रधानमंत्री ने इस नई रेल सेवा के लिए सभी को शुभकामनाएं भी दीं।
दिल्ली और काशी के बीच रेल यात्रा करने वालों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है।
काशी-दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होने से समय की बचत के साथ ही उनका अनुभव बेहतर होने वाला है।
आधुनिक सुविधाओं और अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली से सुसज्जित यह देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन है।
— Narendra Modi (@narendramodi) October 31, 2026
किन शहरों से होकर गुजरेगी
यह ट्रेन वाराणसी से चलकर प्रयागराज और कानपुर सेंट्रल होते हुए नई दिल्ली पहुंचेगी। रास्ते में इसके प्रमुख ठहराव प्रयागराज जंक्शन, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ जंक्शन और गाजियाबाद जंक्शन पर होंगे। इस तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक के कई बड़े शहर एक ही रात्रिकालीन सेवा से जुड़ जाएंगे।
प्रधानमंत्री के अनुसार इस सेवा से लाखों श्रद्धालुओं, पर्यटकों, छात्रों-युवाओं और कारोबारियों की यात्रा सरल होगी। काशी और प्रयागराज धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से देश के सबसे अहम केंद्रों में गिने जाते हैं, जबकि कानपुर और अलीगढ़ कारोबार और उद्योग के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में यह रूट हर वर्ग के यात्रियों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।

स्लीपर ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यात्री रात में सोते हुए सफर पूरा कर लेते हैं और सुबह तक अपने गंतव्य पर पहुंच जाते हैं। इससे दिन का कीमती समय बचता है। कारोबारी यात्री रात को चलकर सुबह दफ्तर या बैठक के लिए तैयार मिल सकते हैं, तो तीर्थयात्री सुबह-सवेरे दर्शन-पूजन के लिए पहुंच सकते हैं।
वाराणसी से नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन का नंबर 27421 है। यह वाराणसी जंक्शन से रात 8:50 बजे रवाना होगी और अगली सुबह 6:10 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। वापसी में नई दिल्ली से वाराणसी चलने वाली ट्रेन का नंबर 27422 है। यह नई दिल्ली से रात 9:40 बजे चलेगी और अगली सुबह लगभग 6:45 से 7:10 बजे के बीच वाराणसी पहुंचेगी।
यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाई जाएगी। वाराणसी से दिल्ली की ओर यह शुक्रवार को नहीं चलेगी, जबकि दिल्ली से वाराणसी की ओर इसका संचालन शनिवार को बंद रहेगा। यात्रियों को टिकट बुक करने से पहले अपनी यात्रा की तारीख के हिसाब से यह जरूर देख लेना चाहिए।

यात्रियों को क्या फायदा होगा
काशी-दिल्ली मार्ग पर पहले से कई ट्रेनें चलती हैं, लेकिन त्योहारों, शादी-ब्याह के मौसम और पर्यटन के दिनों में टिकट मिलना अक्सर मुश्किल हो जाता है। एक नई, आधुनिक स्लीपर ट्रेन के जुड़ने से यात्रियों को विकल्प बढ़ेंगे और भीड़ का दबाव कुछ हद तक घटने की उम्मीद है। रेलवे का कहना है कि उन्नत सुरक्षा व्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं के कारण यात्रा अधिक आरामदायक और तेज होगी।
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काशी आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और सैलानियों के लिए भी यह सेवा सहूलियत भरी साबित हो सकती है। दिल्ली से रात में बैठकर सुबह काशी पहुंचना और फिर दर्शन, गंगा आरती और घाटों की सैर के लिए पूरा दिन मिल जाना, यात्रा की योजना बनाने वालों को खूब भाएगा। इसी तरह प्रयागराज जाने वाले यात्री भी संगम स्नान और धार्मिक आयोजनों के लिए इस ट्रेन का सहारा ले सकेंगे।
आस्था और आधुनिकता का मेल
प्रधानमंत्री के शब्दों में यह ट्रेन परंपरा और आधुनिकता के बीच एक पुल का काम करेगी। एक तरफ सदियों पुरानी आस्था की नगरी काशी है, दूसरी तरफ तेज रफ्तार और आधुनिक तकनीक वाली ट्रेन। दोनों का यह मेल बदलते भारत की उसी तस्वीर को दिखाता है, जिसमें विरासत को सहेजते हुए बुनियादी ढांचे को भी नए दौर के हिसाब से ढाला जा रहा है।

कुल मिलाकर वंदे भारत स्लीपर की यह नई सेवा पूर्वांचल और राजधानी के बीच संपर्क को मजबूत करने वाला कदम मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि शुरुआती दिनों में यात्रियों से इसे कैसी प्रतिक्रिया मिलती है और आने वाले समय में इसकी सुविधाओं को लेकर क्या अनुभव सामने आते हैं।

























