HamirpurNews: हमीरपुर के पटलांदर में 11वीं कक्षा के एक छात्र की संदिग्ध आत्महत्या से परिवार गहरे सदमे में है। जिस बेटे को माता-पिता सेना में भेजकर उसका भविष्य संवारने का सपना देख रहे थे, उसकी अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते उन पर ध्यान देना जरूरी है। घर का इकलौता चिराग, मां-बाप की आंखों का तारा और सेना की वर्दी पहनाने का सपना… सब कुछ एक पल में बिखर गया। बेटे को फंदे से लटका देख मां अनिता के मुंह से बस इतना ही निकला मिठ्ठू तू क्या कित्ता… और फिर आवाज खामोश हो गई। पत्नी की चीख सुन पति बंटी की नींद टूटी। आंख खुली तो कलेजे का टुकड़ा फंदे से लटका हुआ था। पटलांदर में आधी रात को 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले अनि के कथित आत्महत्या के खौफनाक कदम ने मां-बाप को ताउम्र का जख्म दे दिया है। जिस बेटे को माता-पिता सेना में भर्ती करवाने की तैयारी कर रहे थे, उसे अब वह दोबारा नहीं देख सकेंगे। अनि को उसके माता-पिता प्यार से मिठ्ठू बुलाते थे। घटना बाली रात को घर का माहौल सामान्य था। माता-पिता के साथ अनि उर्फ मिठ्ठू ने उस दिन उड़द की दाल और चावल का भोजन किया था। खाना खाते समय उसने मुस्कुराते हुए पिता से कहा था कि उड़द की दाल में मक्खन मिलाने से उसका स्वाद और बढ़ जाता है। किसी को अंदाजा नहीं था कि उसकी यही मुस्कान आखिरी होगी और वही परिवार के लिए सबसे दर्दनाक याद बन जाएगी। घटना के बाद से परिजन गहरे सदमे में हैं और घर में मातम पसरा हुआ है। मां लगातार बेटे को पुकार रही है, जबकि पिता पूरी तरह टूट चुके हैं। जिस घर में बेटे को सेना की वर्दी में देखने के सपने संजोए गए थे, वहां अब केवल उसकी यादें और सन्नाटा रह गया है। पूरे इलाके में इस दुखद घटना को लेकर शोक का माहौल है। वर्ष 2007 में शादी के बाद पिता बंटी ने निजी क्षेत्र की नौकरी और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए दूसरे बच्चे के बारे में नहीं सोचा। उनका मानना था कि वे अपने इकलौते बेटे का बेहतर भविष्य बनाएंगे। परिवार के लोग बताते हैं कि बंटी का सपना था कि उनका बेटा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करे। बंटी का एक भतीजा पहले से सेना में है और उसी की तरह बेटे को भी फौज की वर्दी में देखने की तमन्ना थी। पिता और पुत्र के बीच गहरा लगाव था। रोज सुबह-शाम सैर के दौरान दोनों घंटों बातें करते थे। बेटे के भविष्य, पढ़ाई और सपनों को लेकर पिता हमेशा चिंतित रहते थे। किसी ने नहीं सोचा था कि जिस बेटे के साथ कल तक भविष्य की योजनाएं बन रही थीं, वह इस तरह अचानक सबको छोड़ जाएगा।



















