नशे के अवैध कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर में एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों और पूर्वोत्तर राज्यों की पुलिस ने मिलकर “ऑपरेशन त्रिशूल” चलाया। इसके तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 ठिकानों पर छापे मारे गए। गृह मंत्री के मुताबिक यह अभियान 23 अक्टूबर को चलाया गया। छापेमारी के दौरान जांच टीमों को ऐसे वित्तीय लेनदेन के सुराग मिले, जिनके जरिए नशे के कारोबार से कमाया गया पैसा इधर-उधर किया जा रहा था। एजेंसियों ने करीब 100 करोड़ रुपये के हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई सिर्फ छापों तक सीमित नहीं रही। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क से जुड़े 1,424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, ताकि उनमें जमा रकम का आगे इस्तेमाल न हो सके। इसके अलावा 17.82 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी कुर्क की गई हैं। शाह के अनुसार इस कदम से अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल की आर्थिक कड़ी को बड़ा झटका लगा है।
हवाला एक अनौपचारिक व्यवस्था है, जिसमें पैसा बिना बैंकिंग प्रणाली से गुजरे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है। इसमें भरोसे पर चलने वाले एजेंट होते हैं और लेनदेन का कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं बनता। इसी वजह से नशा तस्कर अपनी काली कमाई को छिपाने और उसे अलग-अलग हाथों में घुमाने के लिए इस रास्ते को चुनते हैं। जांच एजेंसियां मानती हैं कि नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए सिर्फ माल पकड़ना काफी नहीं होता। असली चोट तब लगती है, जब उसकी आर्थिक रीढ़ पर वार किया जाए। खाते फ्रीज करने और संपत्ति कुर्क करने का मकसद यही है कि तस्करों के पास कारोबार चलाने के लिए पैसा ही न बचे।
पूर्वोत्तर के राज्य लंबे समय से नशे की तस्करी के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं। म्यांमार से सटी लंबी और दुर्गम सीमा इसकी एक बड़ी वजह है। यहां से आने वाली खेप देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाई जाती है। इसी कारण असम, मिजोरम और मणिपुर में केंद्र और राज्य की एजेंसियां समय-समय पर साझा अभियान चलाती रही हैं। इस कार्रवाई की खास बात केंद्रीय एजेंसियों और तीनों राज्यों की पुलिस के बीच तालमेल है। अलग-अलग राज्यों में एक ही दिन छापे मारने से आरोपियों को सतर्क होने या सबूत मिटाने का मौका कम मिलता है। साझा खुफिया जानकारी और एक साथ कार्रवाई से नेटवर्क की कई कड़ियां एक साथ पकड़ में आ सकती हैं।
अभी इस मामले में आगे की जांच जारी है। फ्रीज किए गए खातों के लेनदेन खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश है कि पैसा कहां से आया और किन लोगों तक पहुंचा। आने वाले दिनों में नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। नशा समाज, खासकर युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे में नेटवर्क के साथ उसकी वित्तीय व्यवस्था पर भी एक साथ चोट करना एक अहम रणनीति मानी जा रही है। ऑपरेशन त्रिशूल इसी दिशा में उठाया गया ताजा कदम है।




















