नई दिल्ली में हुई एक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों से कहा कि वे युवाओं और विश्वविद्यालयों के साथ ज्यादा बातचीत करें। उन्होंने कहा कि देश की योजनाएं सिर्फ आज की समस्याओं और आंकड़ों को देखकर नहीं बनाई जानी चाहिए, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लंबी अवधि की तैयारी भी जरूरी है।
इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों से कहा कि वे रोजमर्रा की समस्याओं और आंकड़ों पर ध्यान दें, लेकिन सोच को सीमित न रखें। उन्हें यह भी देखना होगा कि अगले कुछ वर्षों में देश की जरूरतें क्या होंगी और उन्हें पूरा करने के लिए अभी से क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्काल चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ भविष्य को ध्यान में रखकर नीतियां तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है और विभागों के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ एक ही विभाग के अंदर भी अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच बेहतर तालमेल होना जरूरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह अपनाने और काम के प्रति जिम्मेदारी व जुड़ाव की भावना के साथ आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने कहा कि युवाओं की सोच से नीतियों को नई दिशा मिल सकती है और युवाओं से सीधे बातचीत करने पर कई नए विचार सामने आ सकते हैं जो सरकारी नीतियों को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
इस बैठक में विश्वविद्यालयों के साथ भी संवाद बढ़ाने पर जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि युवाओं और शिक्षण संस्थानों से मिलने वाले नए और अलग विचारों को नीतियां बनाने की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सचिवों के साथ यह तीसरी उच्चस्तरीय बैठक थी। इसमें बुनियादी ढांचे और संपर्क व्यवस्था, सुरक्षा, विदेश मामलों और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति को लेकर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश साफ था कि सरकार के विभाग केवल अपने-अपने काम तक सीमित न रहें। बेहतर तालमेल, युवाओं से संवाद और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाओं के जरिए सरकारी नीतियों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है।

