मुंबई: मनोरंजन की दुनिया में राज शांडिल्य का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। हँसी-ठहाकों से भरी कहानियों के लिए पहचाने जाने वाले इस निर्देशक-निर्माता ने इस बार दर्शकों को चौंकाने का मन बनाया है। उनकी नई शॉर्ट फिल्म ‘एडम एंड ईव’ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हो चुकी है। यह एक गहरी और रहस्यमयी साइकोलॉजिकल थ्रिलर है। अब तक राज शांडिल्य की पहचान ऐसे कहानीकार की रही है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हास्य ढूँढ लेता है। ऐसे में अंधेरे और सस्पेंस से भरी कहानी चुनना उनके लिए एक बिल्कुल नया प्रयोग माना जा रहा है। यह फिल्म दिखाती है कि वे सिर्फ गुदगुदाने वाले किस्से ही नहीं, दिल की धड़कनें तेज़ करने वाली कहानियाँ भी कह सकते हैं।
फिल्म का केंद्र मुंबई का एक नौजवान है, जो देखने में बेहद आकर्षक और पड़ोस के सीधे-सादे लड़के जैसा लगता है। उसकी मुस्कान और बातचीत किसी को भी भरोसा दिला सकती है। लेकिन इस मासूम चेहरे के पीछे एक खौफनाक सच छिपा है। वह एक सीरियल किलर है, और अपने लिए ऐसा जीवनसाथी खोज रहा है जो उसकी नज़र में पूरी तरह सही हो। प्यार की तलाश और जानलेवा सनक का यही मेल कहानी को दिलचस्प और बेचैन करने वाला बनाता है। फिल्म में मुख्य पुरुष किरदार प्रेम परिजा (जिन्हें प्रेम परिजा के नाम से भी क्रेडिट किया गया है) ने निभाया है। वे मुंबई के उस रहस्यमयी युवक के रूप में नज़र आते हैं, जिसका आकर्षक व्यक्तित्व ही उसका सबसे बड़ा हथियार है। फिल्म में ईव की अहम भूमिका अलीशा चोपड़ा ने निभाई है। इनके अलावा खुशी पिल्लई सहायक भूमिका में दिखाई देती हैं।
‘एडम एंड ईव’ का निर्माण कथावाचक फिल्म्स के बैनर तले हुआ है। फिल्म को राज शांडिल्य और विमल लाहोटी के साथ इंडस्ट्री के कुछ अन्य निर्माताओं का भी सहयोग मिला है। एक मज़बूत प्रोडक्शन टीम के साथ मिलकर बनाई गई यह फिल्म छोटे प्रारूप में भी बड़े स्तर की सोच को दर्शाती है। पिछले कुछ सालों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शॉर्ट फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है। कम समय में कसी हुई कहानी, नए प्रयोग और बेबाक विषय इन फिल्मों की ताकत बन गए हैं। थ्रिलर जैसे जॉनर में तो यह प्रारूप और भी कारगर साबित होता है, क्योंकि सस्पेंस को खींचने की ज़रूरत नहीं पड़ती और हर दृश्य अपनी पकड़ बनाए रखता है।
जो दर्शक कुछ अलग और रोमांचक देखना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म एक अच्छा विकल्प हो सकती है। एक तरफ़ प्यार की तलाश है, दूसरी तरफ़ ख़ौफ़ का साया, और इन दोनों के बीच झूलता एक ऐसा किरदार जो पर्दे पर अपनी अलग छाप छोड़ता है। राज शांडिल्य की हास्य वाली छवि से हटकर यह प्रयोग देखना भी अपने आप में दिलचस्प अनुभव है। कुल मिलाकर ‘एडम एंड ईव’ राज शांडिल्य के रचनात्मक सफ़र का एक साहसी पड़ाव है। अब देखना यह है कि दर्शक उनके इस गंभीर और स्याह अंदाज़ को कितना पसंद करते हैं।
























