जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब अहम मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार को कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के विश्वविद्यालय पहुंचने की खबर है। माना जा रहा है कि वे भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मुलाकात करेंगे। दूसरी ओर, कैंपस के आसपास पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी ने माहौल को बेहद संवेदनशील बना दिया है। राहुल गांधी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब छात्रों का धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र चाहते हैं कि विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का कार्यक्रम घोषित करे। ऐसे में एक बड़े राजनीतिक चेहरे के पहुंचने से आंदोलन की ओर लोगों का ध्यान और बढ़ गया है। यह मुलाकात किन शर्तों पर और किस रूप में होगी, इसे लेकर तस्वीर दौरे के बाद ही साफ होगी। सुरक्षा इंतजामों को देखते हुए यह भी देखना होगा कि उन्हें परिसर के भीतर किस हद तक जाने दिया जाता है।

चुनाव बहाली पर अड़े हैं छात्र
जामिया में छात्र संघ चुनाव की बहाली का मुद्दा नया नहीं है, लेकिन इस बार आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। छात्रों का साफ कहना है कि जब तक चुनाव का कार्यक्रम जारी नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे। उनके मुताबिक छात्र संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने का लोकतांत्रिक माध्यम है। इसके बिना उन्हें अपनी समस्याएं रखने के लिए सही मंच नहीं मिल पा रहा। मंगलवार को शिक्षकों का एक दल छात्रों से बातचीत करने पहुंचा था, पर आंदोलन खत्म करने की शर्त वही रही: पहले चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो।

धारा 163 लागू, कैंपस के बाहर छावनी जैसा नजारा
हालात को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जामिया के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी है। यह प्रावधान पहले की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 की जगह लाया गया है। इसके तहत किसी इलाके में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाई जा सकती है, ताकि गैरकानूनी जमावड़े को रोका जा सके। इसका असर जमीन पर साफ दिख रहा है। कैंपस के प्रवेश द्वारों के बाहर बैरिकेडिंग की गई है और धारा 163 की जानकारी वाले बैनर टांगे गए हैं। लाउडस्पीकर से बार-बार शांति बनाए रखने और पुलिस के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है। फुटपाथ से सटाकर पुलिस के वाहन खड़े किए गए हैं, ताकि छात्र भीड़ की शक्ल में जमा न हो सकें और परिसर में दाखिल न हों। जामिया मेट्रो स्टेशन से लेकर कैंपस के बाहरी हिस्से तक हर जगह सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिनमें अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियां भी शामिल हैं।

धारा 163 का सबसे बड़ा असर मंगलवार को दिखा। ओखला हेड से वीसी आवास तक निकलने वाला प्रस्तावित मार्च नहीं हो सका, क्योंकि ओखला हेड पर ही सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए थे। इस दौरान कुछ छात्रों को हिरासत में भी लिया गया। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने गेट नंबर सात, आठ और दस को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया है। दोनों पक्षों के दावों के बीच कैंपस के बाहर तनाव का माहौल बना हुआ है।
किलेबंदी में जुटा विश्वविद्यालय प्रशासन
पुलिस की तैनाती के साथ-साथ जामिया प्रशासन भी बाहरी लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए इंतजाम कड़े कर रहा है। मंगलवार को 4सी गेट के एक हिस्से को लोहे की टिन शेड से पूरी तरह ढक दिया गया। लोहे की ग्रिल उखाड़कर उसके आसपास दीवार खड़ी कर दी गई, ताकि कोई वहां से भीतर न आ सके। बाउंड्री वॉल को भी ऊंचा किया जा रहा है और सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। इन कदमों से साफ है कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचना चाहता है, हालांकि छात्र इसे अपने आंदोलन को दबाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

इमारतों पर कब्जे के दावे को छात्रों ने नकारा
विवाद का एक और पहलू प्रशासन का वह दावा है, जिसमें कहा गया कि छात्रों ने राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभागों की इमारतों पर कब्जा कर ताले लगा दिए हैं। छात्र इसे पूरी तरह गलत बताते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ विभागों के गलियारों में डेरा डाला है और किसी इमारत पर कब्जा नहीं किया है। उनके अनुसार आंदोलन शांतिपूर्ण है और उसका मकसद पढ़ाई-लिखाई में बाधा डालना नहीं, बल्कि अपनी बात रखना है।
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सबकी नजर दो बातों पर है। पहली, राहुल गांधी का दौरा किस तरह होता है और उसके बाद आंदोलन को कितना बल मिलता है। दूसरी, क्या विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों से बातचीत का रास्ता खोलकर चुनाव का कार्यक्रम घोषित करेगा। छात्र साफ कर चुके हैं कि कार्यक्रम जारी होते ही वे आंदोलन खत्म कर देंगे। जब तक यह गतिरोध नहीं टूटता, कैंपस और उसके आसपास तनाव बने रहने की आशंका है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सेहत भी चिंता का विषय है, इसलिए समाधान जितना जल्दी निकले, उतना बेहतर होगा।


























